

किसान जागरूकता रथ पहुंचा ग्राम पंचायत बासवान, किसानों को दी प्राकृतिक खेती की जानकारी
बासवान। ग्राम पंचायत बासवान में पहुंचे किसान जागरूकता रथ के माध्यम से किसानों को जैविक एवं प्राकृतिक खेती के लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। इस दौरान उपसंचालक कृषि विभाग श्री हरीश मालवीय ने कृषकों को संबोधित करते हुए कहा कि रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की उर्वरा शक्ति लगातार कम हो रही है। प्राकृतिक खेती अपनाकर भूमि की गुणवत्ता को बेहतर बनाया जा सकता है।
उन्होंने किसानों को प्राकृतिक खेती के मुख्य घटकों की जानकारी देते हुए बताया कि बीजामृत का उपयोग बीज उपचार के लिए किया जाता है, जिसे देशी गाय के गोबर, गोमूत्र, चूना एवं मिट्टी से तैयार किया जाता है। वहीं जीवामृत फसल वृद्धि के लिए उपयोगी है, जो गोबर, गोमूत्र, गुड़, बेसन और मिट्टी से तैयार किया जाता है तथा इसका 15 दिन में एक बार छिड़काव करना लाभकारी होता है।
उन्होंने बताया कि नीम अस्त्र एवं ब्रह्मास्त्र जैसे प्राकृतिक कीटनाशक नीम, धतूरा एवं गौमूत्र से तैयार किए जाते हैं, जो फसलों को कीटों से सुरक्षित रखते हैं। साथ ही आच्छादन पद्धति के तहत खेतों को पुआल या फसल अवशेष से ढंकने पर मिट्टी में नमी बनी रहती है और खरपतवार कम उगते हैं।
श्री मालवीय ने कहा कि प्राकृतिक खेती अपनाने से उत्पादन लागत में 60 से 70 प्रतिशत तक कमी लाई जा सकती है, जबकि उपज का बाजार मूल्य भी अधिक मिलता है। उन्होंने बताया कि सरकार प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए किसानों को अनुदान एवं प्रशिक्षण सुविधा भी उपलब्ध करा रही है।
कार्यक्रम में किसानों से अपील की गई कि वे शुरुआत में कम से कम एक एकड़ भूमि पर प्राकृतिक खेती अपनाएं तथा अधिक जानकारी एवं प्रशिक्षण के लिए कृषि विभाग से संपर्क करें।
