
तहसीलदार की मौजूदगी में तोड़ा गया ताला
निवाड़ी। जिला मुख्यालय स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में दिव्यांग बोर्ड के प्रभार को लेकर पिछले करीब पांच माह से चल रहा विवाद मंगलवार को प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद सुलझाने का प्रयास किया गया। तहसीलदार जगदीश रंधावा की उपस्थिति में दिव्यांग बोर्ड कार्यालय में लगे दो ताले हटवाए गए तथा कार्यालय में रखे दस्तावेजों का निरीक्षण एवं वीडियोग्राफी कराई गई।
गौरतलब है कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में दिव्यांग बोर्ड के स्थापना प्रभार को लेकर पूर्व प्रभारी एमपीडब्ल्यू अरविंद आर्या और वर्तमान प्रभारी सहायक नेत्र चिकित्सक राजकुमार वाजपेई के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था। जनवरी माह में विभागीय आदेश के तहत दिव्यांग बोर्ड का प्रभार अरविंद आर्या से लेकर राजकुमार वाजपेई को सौंपा गया था, लेकिन प्रभार हस्तांतरण को लेकर दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन सकी।
विवाद बढ़ने पर दोनों अधिकारियों द्वारा दिव्यांग बोर्ड कार्यालय में अपने-अपने ताले लगा दिए गए थे। इसके चलते दिव्यांग हितग्राहियों को प्रमाण पत्र एवं अन्य शासकीय योजनाओं का लाभ लेने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। मामले को लेकर लगातार शिकायतें वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंच रही थीं।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अनिल झमनानी ने 8 मई को जारी पत्र में खंड चिकित्सा अधिकारी को निर्देश दिए थे कि जांच दल गठित कर वीडियोग्राफी के माध्यम से दिव्यांग बोर्ड का संपूर्ण प्रभार हस्तांतरित कराया जाए। आदेश के पालन में मंगलवार को तहसीलदार जगदीश रंधावा की मौजूदगी में कार्रवाई की गई।
कार्रवाई के दौरान राजकुमार वाजपेई द्वारा अपने ताले की चाबी उपलब्ध कराई गई, जबकि अरविंद आर्या द्वारा लगाए गए ताले को प्रशासनिक मौजूदगी में तोड़ा गया। इसके बाद पूरे कार्यालय की वीडियोग्राफी कराई गई और अंदर रखे दस्तावेजों का सूचीकरण किया गया।
निरीक्षण के दौरान कार्यालय में कई महत्वपूर्ण दस्तावेज सुरक्षित पाए गए। वहीं कार्यालय की टेबल पर रखी श्रीमद्भागवत गीता भी चर्चा का विषय बनी रही।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहले से ही व्यवस्थाओं, अनियमितताओं और कर्मचारियों के बीच गुटबाजी को लेकर चर्चाओं में रहा है। अब दिव्यांग बोर्ड कार्यालय को लेकर सामने आया यह विवाद भी जिला मुख्यालय में चर्चा का विषय बना हुआ है।
