निवाड़ी के कुंवरपुरा गांव में प्राकृतिक खेती और महिला सशक्तिकरण की नई पहल



इस नवाचार की सफलता के पीछे भारत सरकार के प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के विजन के अनुरूप एक बेहतरीन प्रशासनिक समन्वय देखने को मिला है।
कृषि विभाग, निवाड़ी और सृजन संस्था, निवाड़ी के संयुक्त तत्वावधान में तकनीकी एवं रणनीतिक सहयोग प्रदान किया गया।
क्रांति देवी के खेत पर एक ‘जैव संसाधन केंद्र’ की स्थापना की गई, जो गांव के लिए प्राकृतिक खेती के एक लाइव डिमॉन्स्ट्रेशन और इनपुट सप्लाई हब के रूप में कार्य कर रहा है।
प्रमुख गतिविधियाँ एवं तकनीकी हस्तक्षेप
इस केंद्र के माध्यम से ‘जीवामृत’, ‘घनजीवामृत’, और ‘नीमास्त्र’ जैसे उच्च गुणवत्ता वाले जैविक खादों और कीट-नियंत्रकों की स्थानीय स्तर पर आसान उपलब्धता सुनिश्चित की गई।
कृषि विभाग और सृजन संस्था की तकनीकी टीमों द्वारा समय-समय पर कुंवरपुरा गांव में किसानों के लिए व्यावहारिक प्रशिक्षण आयोजित किए जा रहे हैं, जिससे किसानों की झिझक दूर हुई है। जैव संसाधन केंद्र की स्थापना ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पर्यावरण पर दोतरफा सकारात्मक प्रभाव डाला है।
➡️महिला सशक्तिकरण व घरेलू आय क्रांति देवी इन जैविक खादों को अन्य इच्छुक किसानों को बेचकर अपनी घरेलू आय में उल्लेखनीय वृद्धि कर रही हैं, जिससे वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनी हैं।
➡️कृषकों का विश्वास बहाली गांव के अन्य किसानों को स्थानीय स्तर पर तैयार प्रामाणिक जैव-उत्पाद मिलने से उनका प्राकृतिक खेती के प्रति विश्वास और रुझान बढ़ा है।
➡️फसल एवं मृदा स्वास्थ्य खेतों में इन जैविक इनपुट्स के उपयोग से फसलों पर सकारात्मक और उत्साहजनक प्रभाव देखा गया है, साथ ही मिट्टी की दीर्घकालिक उर्वरता भी संरक्षित हो रही है।
“कुंवरपुरा में कृषि विभाग और सृजन संस्था द्वारा की गई यह छोटी सी पहल इस बात का जीवंत उदाहरण है कि कैसे जमीनी स्तर पर सही तकनीकी मार्गदर्शन और महिला नेतृत्व के माध्यम से टिकाऊ कृषि के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है।”
यह मॉडल न केवल रासायनिक खेती पर निर्भरता को कम करता है, बल्कि आजीविका सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण को एक साथ साधता है। निवाड़ी प्रशासन इस सफल मॉडल को जिले के अन्य ग्राम पंचायतों में भी विस्तारित करने के लिए प्रतिबद्ध है ताकि संपूर्ण क्षेत्र को प्राकृतिक खेती की ओर अग्रसर किया जा सके।
