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भोपाल, 21 मई। प्रदेश में लंबे समय से तबादलों का इंतजार कर रहे अधिकारी-कर्मचारियों के लिए राहतभरी खबर है। राज्य मंत्रिमंडल ने बुधवार को तबादला नीति-2026 को मंजूरी दे दी है। इसके तहत 1 जून से 15 जून तक तबादलों पर लगा प्रतिबंध हटाया जाएगा। सरकार का अनुमान है कि इस अवधि में करीब 40 से 42 हजार तबादले किए जा सकते हैं।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि नई तबादला नीति का उद्देश्य ट्रांसफर प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, स्पष्ट और नियंत्रित बनाना है। उन्होंने सभी विभागों को निर्देश दिए हैं कि अपने ‘ए प्लस’ श्रेणी के कार्य 31 मई तक पूर्ण कर लें, ताकि तबादलों की प्रक्रिया प्रभावित न हो।
कैबिनेट निर्णयों की जानकारी देते हुए चैतन्य कश्यप ने बताया कि इस बार तबादला अवधि एक महीने के बजाय केवल 15 दिन रखी गई है। साथ ही, यदि कोई बड़ा विभाग अपनी अलग तबादला नीति लागू करना चाहता है, तो वह सामान्य प्रशासन विभाग के माध्यम से मुख्यमंत्री की मंजूरी लेकर ऐसा कर सकेगा।
स्वैच्छिक और प्रशासनिक तबादले अलग
नई नीति में पहली बार स्वैच्छिक और प्रशासनिक तबादलों को अलग-अलग श्रेणियों में रखा गया है। प्रशासनिक आवश्यकताओं के आधार पर होने वाले तबादलों को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके अलावा ऑनलाइन सिस्टम को बढ़ावा दिया गया है, ताकि सिफारिश और दबाव की संस्कृति पर अंकुश लगाया जा सके।
कर्मचारियों की संख्या के अनुसार तय होगी सीमा
तबादला नीति में विभागों के कर्मचारियों की संख्या के आधार पर ट्रांसफर की अधिकतम सीमा तय की गई है—
200 तक कर्मचारी वाले विभागों में अधिकतम 20 प्रतिशत तबादले
201 से 1000 कर्मचारियों वाले विभागों में अधिकतम 15 प्रतिशत
1001 से 2000 कर्मचारियों वाले विभागों में अधिकतम 10 प्रतिशत
2000 से अधिक कर्मचारियों वाले विभागों में अधिकतम 5 प्रतिशत तबादले किए जा सकेंगे।
मंजूरी की प्रक्रिया भी तय
प्रथम श्रेणी अधिकारियों के तबादलों के लिए मुख्यमंत्री की मंजूरी अनिवार्य होगी। राज्य संवर्ग के प्रथम, द्वितीय और तृतीय श्रेणी कर्मचारियों के तबादले विभागीय मंत्री की स्वीकृति से होंगे।
जिलों में तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के तबादले प्रभारी मंत्री की अनुमति से कलेक्टर करेंगे। वहीं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के मामलों में विभागाध्यक्ष को मंत्री से अनुमति लेनी होगी।
गृह विभाग में डीएसपी से नीचे के अधिकारियों और कर्मचारियों के तबादले पुलिस स्थापना बोर्ड के माध्यम से किए जाएंगे।
गंभीर बीमारी और रिटायरमेंट वालों को राहत
नई नीति में कुछ विशेष श्रेणियों को राहत दी गई है। पति-पत्नी प्रकरण तथा गंभीर बीमारी से पीड़ित कर्मचारियों को तय ट्रांसफर सीमा से बाहर रखा गया है।
कैंसर, किडनी और हृदय रोग जैसी गंभीर बीमारियों के मामलों में मेडिकल बोर्ड की अनुशंसा पर तबादले किए जा सकेंगे। इसके अलावा जिन कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति में एक वर्ष या उससे कम समय बचा है तथा जो कर्मचारी जनगणना कार्य में लगे हैं, उन्हें तबादलों से राहत प्रदान की गई है।
