सरकारी बीज वितरण में अनियमितता के आरोप, किसानों ने उठाई निष्पक्ष जांच की मांग
अतिरिक्त राशि वसूले जाने का दावा, बिना रसीद भुगतान कराने के भी आरोप; कृषि विभाग का पक्ष आना बाकी

निवाड़ी। खरीफ सीजन में किसानों को राहत देने के उद्देश्य से वितरित किए जा रहे मूंगफली, उड़द एवं तिली के सरकारी बीजों के वितरण को लेकर जिले में सवाल उठने लगे हैं। कई किसानों ने नाम प्रकाशित न करने की शर्त पर आरोप लगाया है कि सरकारी बीज वितरण के दौरान उनसे निर्धारित राशि से अधिक पैसे लिए जा रहे हैं। किसानों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है।
किसानों का आरोप है कि 80 किलो मूंगफली बीज के लिए निर्धारित प्रक्रिया के विपरीत उनसे लगभग 7,200 रुपये तक लिए जा रहे हैं। वहीं कुछ किसानों का कहना है कि बीज वितरण का कार्य कर रही संस्था द्वारा प्रति किसान 1,300 से 1,400 रुपये तक अतिरिक्त राशि वसूली जा रही है, जबकि इस राशि की कोई रसीद भी उपलब्ध नहीं कराई जा रही। किसानों का दावा है कि यदि ये आरोप सही हैं, तो सरकारी योजना का लाभ सीधे किसानों तक पहुंचने के बजाय बीच के स्तर पर प्रभावित हो रहा है। इस संबंध में किसी विस्तार अधिकारी भारत राजवंशी से फोन पर संपर्क करना चाहा तो उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया और मिलने पर उन्होंने यह भी नहीं बताया कि बीज वितरण की क्या गाइडलाइन है।
स्थानीय किसानों का कहना है कि बीज वितरण की संपूर्ण प्रक्रिया की पारदर्शी एवं निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। उनका कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो अनेक किसान सरकारी बीज से वंचित रह जाएंगे और उन्हें बाजार से अधिक कीमत पर बीज खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
उल्लेखनीय है कि हाल ही में कलेक्टर ने अधिकारियों को किसानों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने तथा शासकीय योजनाओं का पारदर्शी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे। ऐसे में यदि किसानों द्वारा लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करेगा।
हालांकि, इस संबंध में कृषि विभाग का पक्ष समाचार लिखे जाने तक प्राप्त नहीं हो सका। विभाग का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा। किसानों ने मामले की उच्च स्तरीय जांच कराकर दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की है।