जन्माष्टमी पर मध्यप्रदेश में सजेगा कृष्णमय माहौल, 29 प्रमुख स्थलों पर होंगे सांस्कृतिक आयोजन
श्रीकृष्ण के जीवन-दर्शन, लीलाओं और मित्रता के प्रसंगों पर आधारित होंगी नृत्य-नाटिकाएं और भजन प्रस्तुतियां

भोपाल। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर मध्यप्रदेश के 29 ऐतिहासिक, धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों पर ‘श्रीकृष्ण पर्व’ का आयोजन किया जाएगा। श्रीकृष्ण पाथेय न्यास एवं मध्यप्रदेश शासन के संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित इस पर्व में प्रदेश और देश के ख्यातिलब्ध कलाकार संगीत, नृत्य, नाट्य, लोकगायन एवं भजन के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण के जीवन-दर्शन, लीलाओं और लोकमंगल की भावना को प्रस्तुत करेंगे।
संस्कृति विभाग के संचालक एन.पी. नामदेव ने बताया कि श्रीकृष्ण से जुड़े ऐतिहासिक एवं धार्मिक स्थलों को केंद्र में रखकर आयोजित होने वाला यह पर्व आस्था और कला का संगम बनेगा। आयोजन के माध्यम से नई पीढ़ी को मध्यप्रदेश की समृद्ध धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराने के साथ भगवान श्रीकृष्ण के जीवन मूल्यों—धैर्य, मित्रता, करुणा और दया—का संदेश जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
उज्जैन में पांच दिवसीय आयोजन
उज्जैन जिले के नारायणा धाम में 2 से 6 सितंबर तक पांच दिवसीय सांस्कृतिक आयोजन होगा। यहां श्रीकृष्ण-सुदामा प्रसंग, गुरु सांदीपनि आश्रम से जुड़ी कथाओं और गीता उपदेश पर आधारित नृत्य-नाटिकाएं प्रस्तुत की जाएंगी। भरतनाट्यम, कथक, ओडिसी, भजन और रासलीला के कार्यक्रम भी होंगे।
वहीं सांदीपनि आश्रम उज्जैन में 2 से 4 सितंबर तक गुरु-शिष्य परंपरा पर केंद्रित आयोजन होगा। इसमें श्रीकृष्ण द्वारा महर्षि सांदीपनि से शिक्षा प्राप्त करने तथा 64 कलाओं एवं विद्याओं के ज्ञान से जुड़े प्रसंगों को मंचित किया जाएगा।
महिदपुर में राधा-कृष्ण प्रेम और लोकसंगीत
रामलीला चौक, महिदपुर में 2 से 4 सितंबर तक तीन दिवसीय कार्यक्रम होगा। राधा-कृष्ण प्रेम प्रसंग, श्रीकृष्ण जन्म और कृष्ण पाथेय से जुड़ी परंपराओं पर आधारित प्रस्तुतियों के साथ बुंदेली लोकगायन एवं भजन कार्यक्रम आयोजित होंगे।
पन्ना और अमझेरा में साकार होंगे पौराणिक प्रसंग
पन्ना के श्री बलदेवजी मंदिर में 2 सितंबर को बलदेव-श्रीकृष्ण प्रसंग पर नृत्य-नाटिका एवं भजन गायन होगा। जुगल किशोर मंदिर में 3 एवं 4 सितंबर को कृष्ण भक्ति की प्रणामी परंपरा और श्रीकृष्ण लीला पर आधारित प्रस्तुतियां होंगी।
धार जिले के अमझेरा में 3 एवं 4 सितंबर को श्रीकृष्ण लीला, रुक्मिणी हरण और विवाह प्रसंग पर आधारित नृत्य-नाटिकाएं प्रस्तुत की जाएंगी।
जामगढ़ और जानापाव में भी विशेष आयोजन
रायसेन जिले के जामगढ़ में श्रीकृष्ण और जामवंत से जुड़े प्रसंगों पर महानाट्य एवं ‘कृष्णायन’ स्टोरी टेलिंग की प्रस्तुति होगी। महू के जानापाव में भगवान परशुराम और श्रीकृष्ण के प्रसंग पर आधारित नृत्य-नाटिका के साथ अस्त्र-शस्त्र प्रदर्शनी भी आयोजित की जाएगी।
प्रदेश के कई जिलों में गूंजेगी कृष्ण भक्ति
श्रीकृष्ण पर्व के तहत उमरिया, शहडोल, मंडला, दमोह, रीवा, देवास, आगर-मालवा, गुना, ग्वालियर, छतरपुर, शिवपुरी, झाबुआ, नीमच, मंदसौर, मुरैना, राजगढ़ और इंदौर सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों में भी आयोजन होंगे।
इन कार्यक्रमों में कृष्ण-सुदामा मित्रता, गोवर्धन धारण, कालियानाग वध, रुक्मिणी हरण, गीत गोविंद, जामवंत प्रसंग और श्रीकृष्ण जन्म जैसे विभिन्न प्रसंगों को नृत्य-नाटिका, लोकगायन और भजन के माध्यम से प्रस्तुत किया जाएगा।
विरासत और संस्कृति को मिलेगा नया मंच
श्रीकृष्ण पर्व के माध्यम से प्रदेश के उन धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थलों को भी व्यापक पहचान देने का प्रयास किया जा रहा है, जिनका संबंध भगवान श्रीकृष्ण की जीवन-परंपरा और पौराणिक कथाओं से जुड़ा माना जाता है। सरकार द्वारा ‘श्रीकृष्ण पाथेय’ की अवधारणा के तहत इन स्थलों के धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन विकास पर भी जोर दिया जा रहा है। आयोजनों के जरिए आस्था के साथ प्रदेश की कला, संस्कृति और गौरवशाली विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।