सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बंद करने के विरोध में बाजार बंद, मिला-जुला रहा असर
गांधी चबूतरे पर हुई आमसभा में राजनीतिक दलों और नागरिकों ने जताया विरोध, पुनः संचालन की मांग

निवाड़ी। जिला मुख्यालय पर वर्षों से संचालित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को बंद किए जाने के विरोध में जिला विकास संघर्ष समिति के आह्वान पर बुधवार को बाजार बंद कराया गया। बाजार बंद का असर मिला-जुला रहा। जहां कुछ दुकानदारों ने सुबह से ही दुकानें बंद रखकर स्वास्थ्य केंद्र के समर्थन में विरोध दर्ज कराया, वहीं कई दुकानदारों ने अपनी दुकानें सामान्य रूप से संचालित कीं।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बंद किए जाने के विरोध में जिला विकास संघर्ष समिति द्वारा गांधी चबूतरे पर आमसभा का आयोजन किया गया। आमसभा में विभिन्न राजनीतिक दलों के जनप्रतिनिधियों के साथ बड़ी संख्या में नागरिकों ने भाग लिया। सभी ने एक स्वर में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को पूर्व की भांति संचालित किए जाने की मांग उठाई।
गौरतलब है कि 26 जुलाई को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा जिला मुख्यालय पर जिला चिकित्सालय भवन का लोकार्पण किया गया था। इसके दो दिन बाद जिला अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाएं प्रारंभ कर दी गईं। इसके बाद नगर में वर्षों से संचालित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर सूचना चस्पा कर यहां मिलने वाली स्वास्थ्य सुविधाएं बंद किए जाने और सेवाओं को जिला अस्पताल में स्थानांतरित किए जाने की जानकारी दी गई थी।
इसके बाद से ही नगरवासियों द्वारा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बंद किए जाने का विरोध किया जा रहा था। जिला विकास संघर्ष समिति ने आमजन की मांग को लेकर आंदोलन का निर्णय लेते हुए 16 सितंबर को बाजार बंद और प्रदर्शन का आह्वान किया था। समिति द्वारा नगर में पर्चे वितरित कर लोगों से बंद को सफल बनाने की अपील की गई थी। एक दिन पूर्व दुकानदारों से भी दुकानें बंद रखने का आग्रह किया गया था, लेकिन इसके बावजूद बाजार में कई दुकानें खुली रहीं।
‘जिला अस्पताल शुरू हुआ तो स्वास्थ्य केंद्र बंद क्यों?’
गांधी चबूतरे पर आयोजित आमसभा में वक्ताओं ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बंद किए जाने पर सवाल उठाए। आमजन ने कहा कि जिला मुख्यालय पर जिला अस्पताल शुरू होने के बाद नगर का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बंद किया जाना उचित नहीं है। वक्ताओं ने उदाहरण देते हुए कहा कि जिस प्रकार जिला स्तर पर डीएम कार्यालय संचालित होने के बावजूद एसडीएम कार्यालय बंद नहीं किया जाता, उसी प्रकार जिला अस्पताल शुरू होने के बाद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को भी संचालित रखा जाना चाहिए।
आमसभा में टीकमगढ़ और झांसी के उदाहरण भी दिए गए। वक्ताओं ने बताया कि टीकमगढ़ में जिला अस्पताल संचालित होने के बावजूद शहर के स्वास्थ्य केंद्रों को बंद नहीं किया गया। इसी प्रकार झांसी में मेडिकल कॉलेज शुरू होने के बाद भी शहर में संचालित स्वास्थ्य सेवाओं को जारी रखा गया।
वक्ताओं का कहना था कि निवाड़ी में जिला अस्पताल शुरू होने के बाद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बंद कर दिया गया है, जिससे नगरवासियों को स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए जिला अस्पताल पर निर्भर होना पड़ेगा।
प्रशासन को सौंपा ज्ञापन
आमसभा के बाद जिला विकास संघर्ष समिति के सदस्यों एवं नागरिकों ने जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को पूर्व की भांति पुनः संचालित किए जाने की मांग की गई। समिति का कहना है कि नगर में स्वास्थ्य केंद्र संचालित रहने से स्थानीय नागरिकों को प्राथमिक एवं आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं आसानी से उपलब्ध हो सकेंगी।