
गाद निकलवाने और अतिक्रमण हटाने का उठाया मुद्दा
निवाड़ी। सिंदूर सागर तालाब के भराव एवं डूब क्षेत्र से जुड़ी समस्याओं को लेकर क्षेत्र के किसानों ने कलेक्टर कार्यालय में ज्ञापन सौंपकर तालाब के डूब क्षेत्र का सीमांकन कराने, तालाब में जमा गाद निकलवाने तथा डूब क्षेत्र में बने मकानों को उचित मुआवजा देकर विस्थापित कराने की मांग की है। ज्ञापन में तालाब के प्राकृतिक जल निकास से किसी प्रकार की छेड़छाड़ नहीं करने की भी मांग की गई है।
ज्ञापन में बताया गया कि सिंदूर सागर तालाब के भरने के बाद ढिमरपुरा बस्ती के लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। तालाब के डूब क्षेत्र का सीमांकन कराकर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की मांग की गई है। किसानों का कहना है कि तालाब बनने के समय से ही प्रत्येक वर्ष बारिश के दौरान मिट्टी और गाद जमा होती रही है, जिसके कारण तालाब की गहराई कम हो गई है और पानी का फैलाव जल्दी होने लगा है। तालाब खाली होने के बाद गाद निकलवाकर उसका गहरीकरण कराने की मांग की गई है।
ज्ञापन में डूब क्षेत्र में बने मकानों को उचित मुआवजा देकर विस्थापित करने की मांग भी रखी गई। साथ ही सिंदूर सागर तालाब को सिंदूर सागर पंचायत की धरोहर बताते हुए डूब क्षेत्र में दिए गए पट्टों की जांच एवं उन्हें निरस्त कर स्थानीय किसानों को प्राथमिकता देने की मांग की गई है। तालाब में मछली पालन के पट्टे को लेकर भी ज्ञापन में ढिमरपुरा के मछुआ समुदाय का पट्टा निरस्त कर सिंदूर सागर के मछुआ समुदाय को देने की मांग की गई।
किसानों ने ज्ञापन में कहा कि ढिमरपुरा के किसान तालाब के पानी का उपयोग डीजल इंजन एवं मोटर के माध्यम से सिंचाई के लिए करते हैं। इसके अलावा तालाब के खाली होने पर डूब क्षेत्र में अस्थाई पट्टों पर खेती भी की जाती है। वहीं, मछुआ समुदाय द्वारा तालाब में मछली पालन कर व्यापार किए जाने का उल्लेख भी किया गया है।
ज्ञापन में सिंदूर सागर, कुडार, गंज, दुर्गापुर, बंगरा, सेंदरी, सादिकपुरा और मोदी सहित आसपास के गांवों के किसानों ने तालाब के पानी से खेतों की सिंचाई किए जाने की बात कही है। किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि तालाब के अतिरिक्त पानी के प्राकृतिक निकास मार्ग से किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ नहीं की जाए। उनका कहना है कि प्राकृतिक जल निकास को बाधित करने से पानी के कटाव की समस्या उत्पन्न हो सकती है और भविष्य में तालाब का पूरा पानी निकल जाने से गर्मी के दिनों में भूजल स्तर प्रभावित होकर पेयजल संकट की स्थिति बन सकती है।
ज्ञापन में पिछले वर्षों में क्षेत्र में पड़े भीषण सूखे का भी उल्लेख किया गया। किसानों ने कहा कि जल संरक्षण और जल स्तर बढ़ाने के उद्देश्य से शासन द्वारा जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत गहरीकरण अभियान चलाया गया था, लेकिन सिंदूर सागर तालाब को इसका अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाया। किसानों ने प्रशासन से तालाब का वैज्ञानिक तरीके से गहरीकरण कराने, डूब क्षेत्र का सीमांकन कराने और प्रभावित परिवारों की समस्या का उचित समाधान कराने की मांग की है। ज्ञापन देने वालों में सिंदूरसागर सरपंच शिवराम तिवारी(शैलू), रमेश तिवारी, करण सिंह खंगार,जितेंद्र कुमार, मधुसूदन तिवारी, कृपाराम यादव,जयराम यादव, सियाराम, हरचरण यादव सादिकपुरा,बलवान सिंह सादिकपुरा, अजय कुमार सादिकपुरा, बनमली सादिकपुरा,हुकुम सिंह सेंदरी सहित दर्जनों ग्राम वासी उपस्थित रहे

