
निवाड़ी। नगर के वार्ड क्रमांक 5 स्थित श्री अचलेश्वर महादेव मंदिर परिसर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के द्वितीय दिवस कथा व्यास दीनबंधु दास जी महाराज ने पुरुषोत्तम मास के महत्व, भगवत कृपा प्राप्ति के मार्ग एवं सच्चे संत की परिभाषा पर विस्तार से प्रकाश डाला।
श्री अचलेश्वर महादेव मंदिर के 11 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित कथा के दौरान दीनबंधु दास जी महाराज ने कहा कि भगवान को प्राप्त करने के लिए मन में दया और दान का भाव होना आवश्यक है। यदि व्यक्ति प्रत्येक जीव के प्रति दया रखे और कर्ण जैसी दानशीलता अपनाए, तो उस पर भगवान की कृपा अवश्य होती है।
उन्होंने पुरुषोत्तम मास का महत्व बताते हुए कहा कि इस माह में किए गए पुण्य कार्य सामान्य दिनों की अपेक्षा सौ गुना अधिक फलदायी होते हैं। इस दौरान तीर्थ यात्रा, पवित्र नदियों में स्नान, संतों को भोजन कराना तथा घी का दीपक जलाना विशेष पुण्यदायी माना गया है। उन्होंने श्रद्धालुओं से पुरुषोत्तम मास में अधिक से अधिक धार्मिक कार्य करने का आह्वान किया।
कथा व्यास ने वृंदावन धाम की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि वृंदावन की रज और यमुना का जल आज भी पवित्र हैं, क्योंकि वहां भगवान श्रीकृष्ण के चरण पड़े हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी पवित्र धाम पर जाने पर केवल भगवान के नाम का स्मरण करना चाहिए, जिससे धाम की कृपा अवश्य प्राप्त होती है।
दीनबंधु दास जी महाराज ने सच्चे संत की परिभाषा बताते हुए कहा कि सरलता, सहजता और सहनशीलता ही संत के वास्तविक गुण हैं।
कथा के दौरान बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के विशेष कृपा पात्र रोहित रिछारिया का भी सानिध्य श्रद्धालुओं को प्राप्त हुआ। कथा में बड़ी संख्या में महिला एवं पुरुष श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर श्रीमद्भागवत कथा श्रवण का लाभ प्राप्त किया।
