
निवाड़ी। नगर के वार्ड क्रमांक 5 स्थित श्री अचलेश्वर महादेव मंदिर के स्थापना वर्ष के 11 वर्ष पूर्ण होने पर 12 मई से आयोजित श्रीमद्भागवत ज्ञान यज्ञ सप्ताह के पंचम दिवस कथा व्यास दीनबंधु दास जी महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा के दौरान श्रद्धालु भक्ति रस में डूबे नजर आए।
मलूक पीठाधीश्वर श्री राजेंद्र दास जी महाराज के कृपापात्र एवं देश के ख्यातिप्राप्त कथा वाचक दीनबंधु दास जी महाराज ने कहा कि पृथ्वी पर स्थित सात पुरी, चार धाम एवं भू-बैकुंठ की यात्रा जीवन में एक बार अवश्य करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इन तीर्थों का दर्शन मनुष्य के जीवन को पवित्र और सार्थक बनाता है।
कथा के दौरान उन्होंने बट सावित्री व्रत का महत्व बताते हुए कहा कि बट वृक्ष भगवान विष्णु का स्वरूप माना गया है और सनातन धर्म में इसकी पूजा का विशेष महत्व है। उन्होंने दान और पुण्य की व्याख्या करते हुए कहा कि दान करते समय देश, काल, पात्र और वस्तु का विचार आवश्यक है, जबकि पुण्य कार्य के लिए किसी विशेष मुहूर्त की आवश्यकता नहीं होती।
कथा व्यास ने सच्चे मित्र की परिभाषा बताते हुए कहा कि जो व्यक्ति हमें गलत मार्ग से दूर रखकर सत्य और धर्म की राह दिखाए, वही सच्चा मित्र होता है। उन्होंने कहा कि जीवन में भगवान को ही अपना सच्चा मित्र बनाना चाहिए, क्योंकि भगवान कभी भेदभाव नहीं करते और सदैव सही मार्ग पर चलना सिखाते हैं।
भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन करते हुए उन्होंने बताया कि जब ठाकुर जी घुटनों के बल चलने लगे, तब उनका नामकरण संस्कार हुआ, जिसमें बड़े बालक का नाम बलराम और छोटे बालक का नाम श्रीकृष्ण रखा गया। कथा में भगवान श्रीकृष्ण की माखन चोरी एवं अन्य बाल लीलाओं का भी सुंदर चित्रण किया गया।
उन्होंने कहा कि दाऊ जी और गिरिराज महाराज साक्षात ब्रज में विराजमान हैं तथा श्रद्धा से की गई प्रार्थना से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
कथा में भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष डॉ. नंदकिशोर नापित, जिला प्रौढ़ शिक्षा अधिकारी राजेश पटेरिया सहित बड़ी संख्या में महिला एवं पुरुष श्रद्धालु उपस्थित रहे।
