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निवाड़ी। जिला मुख्यालय के समीप स्थित ग्राम चुरारा में भूमि के बढ़ते क्रय-विक्रय को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। क्षेत्र में जमीनों के दाम लगातार बढ़ने के साथ-साथ विक्रय से प्रतिबंधित भूमि के हस्तांतरण और अनुमति प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार रेलवे स्टेशन, प्रस्तावित एवं विकसित हो रहे संपर्क मार्गों तथा जिला अस्पताल जैसी प्रमुख परियोजनाओं के कारण ग्राम चुरारा की जमीनों की मांग में तेजी आई है। इसके चलते यह क्षेत्र जिले में भूमि कारोबार का प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है। कई लोगों का मानना है कि भूमि खरीद-फरोख्त के मामले में चुरारा अब ओरछा के बाद प्रमुख स्थान हासिल कर चुका है।
क्षेत्र में यह चर्चा भी है कि कुछ प्रतिबंधित श्रेणी की भूमि के विक्रय की अनुमति प्राप्त कर रजिस्ट्रियां कराई जा रही हैं। हालांकि इन चर्चाओं की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।
चुरारा बना भूमि निवेशकों की पहली पसंद
जानकारों का कहना है कि राष्ट्रीय राजमार्ग से बेहतर संपर्क, रेलवे स्टेशन की निकटता और जिला अस्पताल जैसे विकास कार्यों के कारण चुरारा में भूमि की कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इसी वजह से निवेशकों और भूमि कारोबारियों की रुचि इस क्षेत्र में लगातार बढ़ रही है।
खेती से घटती आय और बढ़ता भूमि विक्रय
ग्रामीण क्षेत्र में किसानों को खेती में बढ़ती लागत, प्राकृतिक आपदाओं और कम लाभ जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि आर्थिक दबाव के चलते कई किसान अपनी भूमि बेचने को मजबूर हो रहे हैं। वहीं भूमि की बढ़ती कीमतों का लाभ निवेशक और कारोबारी वर्ग अधिक उठा रहा है।
ग्रामीणों ने भूमि हस्तांतरण और प्रतिबंधित भूमि की अनुमति संबंधी मामलों में पारदर्शिता बनाए रखने तथा आवश्यक होने पर जांच कराने की मांग की है, ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता की स्थिति स्पष्ट हो सके।

