निवाड़ी भाजपा की नई जिला कार्यकारिणी पर उठे सवाल, गहोई वैश्य समाज की अनदेखी को लेकर बढ़ी नाराजगीसमाचार

निवाड़ी। भारतीय जनता पार्टी द्वारा निवाड़ी जिले की नई जिला कार्यकारिणी की घोषणा के बाद संगठन के भीतर और राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। कार्यकारिणी में सामाजिक प्रतिनिधित्व को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। खासतौर पर गहोई वैश्य समाज को अपेक्षित प्रतिनिधित्व नहीं मिलने को लेकर समाज के लोगों में नाराजगी की चर्चा है।
स्थानीय राजनीतिक हलकों में नई कार्यकारिणी में एक वर्ग को अपेक्षाकृत अधिक प्रतिनिधित्व मिलने की बात कही जा रही है। चर्चाओं के मुताबिक, कार्यकारिणी के करीब 20 से 25 प्रतिशत पद ब्राह्मण समाज के प्रतिनिधियों को मिलने की बात सामने आ रही है। वहीं, बुंदेलखंड में सामाजिक और व्यापारिक रूप से प्रभावशाली माने जाने वाले गहोई वैश्य समाज को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिलने पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं।
गहोई समाज की उपेक्षा पर जताई जा रही नाराजगी
गहोई वैश्य समाज को लंबे समय से भाजपा के परंपरागत समर्थक सामाजिक समूहों में माना जाता रहा है। ऐसे में जिला संगठन की नई टीम में समाज के प्रतिनिधित्व को लेकर असंतोष की स्थिति बनने की चर्चाएं हैं। समाज से जुड़े लोगों का कहना है कि संगठन में सक्रिय भूमिका निभाने वाले कार्यकर्ताओं को उचित स्थान मिलना चाहिए था।
हालांकि, कार्यकारिणी में सामाजिक प्रतिनिधित्व को लेकर भाजपा की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
सामाजिक समीकरणों को लेकर बढ़ी राजनीतिक चर्चा
बुंदेलखंड की राजनीति में जातीय और सामाजिक समीकरण हमेशा महत्वपूर्ण रहे हैं। निवाड़ी जैसे क्षेत्र में विभिन्न सामाजिक वर्गों की राजनीतिक भूमिका को देखते हुए भाजपा की नई जिला कार्यकारिणी को लेकर उठ रहे सवालों को आगामी चुनावी राजनीति से जोड़कर भी देखा जा रहा है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि संगठन में किसी भी प्रभावशाली सामाजिक वर्ग की नाराजगी को लंबे समय तक नजरअंदाज करना राजनीतिक रूप से नुकसानदायक हो सकता है। खासकर ऐसे समय में जब आने वाले वर्षों में स्थानीय निकाय और अन्य चुनावों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज होंगी।
डैमेज कंट्रोल की चुनौती
कार्यकारिणी की घोषणा के बाद उठ रही आपत्तियों ने भाजपा के जिला और प्रदेश नेतृत्व के सामने संगठनात्मक संतुलन बनाए रखने की चुनौती खड़ी कर दी है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि पार्टी नेतृत्व इस नाराजगी को किस तरह दूर करता है और क्या संगठन में सामाजिक संतुलन को लेकर कोई कदम उठाया जाता है।
फिलहाल नई जिला कार्यकारिणी को लेकर भाजपा के भीतर और बाहर चर्चा तेज है। आने वाले दिनों में यदि नाराजगी खुलकर सामने आती है, तो इसका असर जिले की स्थानीय राजनीति और संगठनात्मक समीकरणों पर भी देखने को मिल सकता