

मूल शिलालेख ढकने पर पार्षद गजेन्द्र राय ने जताई आपत्ति, निष्पक्ष जांच की मांग
निवाड़ी। नगर परिषद निवाड़ी के नवीन कार्यालय भवन के पूर्व में लोकार्पित होने के बावजूद उसे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के 26 जुलाई के निवाड़ी कार्यक्रम में पुनः लोकार्पण के लिए शामिल किए जाने और भवन पर लगे मूल शिलालेख को कागज से ढकने का मामला सामने आया है। वार्ड क्रमांक-05 के पार्षद गजेन्द्र राय ने इस संबंध में मुख्य नगर पालिका अधिकारी को लिखित आपत्ति प्रस्तुत कर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
पार्षद गजेन्द्र राय के अनुसार नवीन नगर परिषद कार्यालय भवन का निर्माण पूर्ण होने के बाद उसका पूर्व में ही लोकार्पण किया जा चुका है। भवन पर लगाए गए मूल शिलालेख में निर्माण कार्य की स्वीकृत राशि ₹244 लाख के साथ तत्कालीन निर्वाचित जनप्रतिनिधियों, पार्षदों, तत्कालीन मुख्य नगर पालिका अधिकारी एवं उपयंत्री सहित संबंधित अधिकारियों के नाम अंकित हैं। उनका कहना है कि 22 जुलाई 2026 की जियो-टैग फोटो में भी मूल शिलालेख भवन पर स्पष्ट रूप से लगा हुआ दिखाई देता है, जबकि वर्तमान में उसे कागज से ढका गया है।
उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व में लोकार्पित भवन को मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में दोबारा लोकार्पण के लिए शामिल करने तथा पुराने शिलालेख को ढककर नया शिलालेख लगाने की कोशिश के पीछे तत्कालीन अधिकारियों और निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के नाम हटाने की मंशा हो सकती है। हालांकि उन्होंने पूरे मामले की जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट किए जाने की मांग की है।
पार्षद ने यह भी सवाल उठाया कि 26 जुलाई को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव निवाड़ी में कलेक्टर कार्यालय और जिला चिकित्सालय के लोकार्पण कार्यक्रम में पहुंचे थे। नगर परिषद कार्यालय इन स्थानों से लगभग 100 मीटर की दूरी पर होने के बावजूद मुख्यमंत्री कार्यालय भवन में नहीं आए। ऐसे में अब पुराने शिलालेख को ढककर नया शिलालेख लगाने की आवश्यकता और इसके उद्देश्य को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
राजनीतिक बैनर मामले को भी जांच से जोड़ने की मांग
गजेन्द्र राय ने अपने आवेदन में मुख्यमंत्री के निवाड़ी दौरे के दौरान लगाए गए राजनीतिक होर्डिंग-बैनर का भी उल्लेख किया है। उनका आरोप है कि एक बैनर में उनकी बिना सहमति फोटो के साथ भाजपा का चुनाव चिन्ह कमल लगाया गया था तथा मुख्य नगर पालिका अधिकारी एवं इंजीनियर के नाम ‘सौजन्य’ से अंकित किए गए थे। इस संबंध में उनके द्वारा पूर्व में शिकायत प्रस्तुत किए जाने के बावजूद संतोषजनक जवाब नहीं मिलने की बात कही गई है।
पार्षद ने दोनों घटनाओं को जोड़ते हुए नगर परिषद अधिकारियों की राजनीतिक निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए हैं और यह जांच कराने की मांग की है कि कहीं शासकीय पद, नगर परिषद के संसाधनों अथवा अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका का राजनीतिक उद्देश्य के लिए उपयोग तो नहीं किया गया।
मूल शिलालेख को यथावत रखने की मांग
आवेदन में पार्षद ने मूल शिलालेख को तत्काल कागज से मुक्त कर पूर्ववत प्रदर्शित करने, उसे ढकने के आदेश या निर्देश की जानकारी देने तथा यदि कोई लिखित आदेश जारी हुआ है तो उसकी प्रमाणित प्रति उपलब्ध कराने की मांग की है। साथ ही मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में नगर परिषद कार्यालय के पुनः लोकार्पण संबंधी प्रस्ताव, कार्यक्रम या निर्देश किस स्तर से जारी हुए, इसकी जानकारी भी मांगी गई है।
उन्होंने मांग की है कि यदि नया शिलालेख तैयार किया जा रहा है तो उसका आधार, आदेश एवं स्वीकृति सार्वजनिक की जाए तथा तत्कालीन जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के नाम वाले मूल शिलालेख को किसी भी स्थिति में हटाया न जाए।
गजेन्द्र राय ने चेतावनी दी है कि यदि मूल शिलालेख को तत्काल पूर्ववत प्रदर्शित नहीं किया गया तो वे इस संबंध में न्यायालय के समक्ष उचित विधिक कार्रवाई प्रस्तुत करेंगे। उन्होंने दोनों प्रकरणों की निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने वाले अधिकारी अथवा व्यक्ति के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है।

