मोहन कैबिनेट के बड़े फैसले: 41 हजार करोड़ से विकास को रफ्तार, निवाड़ी समेत 4 जिलों को भी मिली सौगात
125 दिन के रोजगार की गारंटी, 3 नए प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय और सांची डेयरी विस्तार को मंजूरी

भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार 1 सितंबर को हुई मध्यप्रदेश मंत्रि-परिषद की बैठक में प्रदेश के विकास, ग्रामीण रोजगार, शिक्षा, सड़क अधोसंरचना, डेयरी विकास, स्वास्थ्य सेवाओं और प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। कैबिनेट ने लगभग 41 हजार करोड़ रुपये से अधिक के वित्तीय प्रस्तावों और जनकल्याणकारी योजनाओं को स्वीकृति एवं अनुसमर्थन प्रदान किया।

बैठक में ग्रामीण रोजगार के लिए नई विकसित भारत (ग्रामीण) योजना, प्रदेश में तीन नए प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालयों की स्थापना, पश्चिम भोपाल बायपास, मेहलुआ-बीना-खिमलासा-मालथौन मार्ग निर्माण, सांची ब्रांड एवं सहकारी डेयरी व्यवस्था के विस्तार सहित कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। वहीं नवगठित जिला निवाड़ी सहित चार जिलों में जिला आयुष कार्यालयों के लिए पदों के सृजन को भी स्वीकृति मिली है।

ग्रामीणों को अब 100 की जगह 125 दिन रोजगार की गारंटी

कैबिनेट ने विकसित भारत (ग्रामीण) योजना को 1 जुलाई 2026 से प्रभावशील किए जाने का अनुसमर्थन किया। योजना के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 में अनुमानित 3,183 करोड़ रुपये तथा वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक कुल 26,436 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत के वित्तीय प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है।

केंद्र और राज्य का अंश 60:40 के अनुपात में होगा, जिसमें राज्यांश 10,574 करोड़ रुपये रहेगा। प्रशासनिक व्यय के लिए पांच वर्षों में 946 करोड़ रुपये राज्य शासन वहन करेगा।

नई व्यवस्था के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में इच्छुक वयस्कों को अब प्रत्येक वित्तीय वर्ष में 100 दिन के स्थान पर 125 दिन के श्रमजन्य रोजगार की वैधानिक गारंटी दी जाएगी।

हर जिले में नियुक्त होगा लोकपाल

योजना में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए बायोमेट्रिक उपस्थिति, डिजिटल मस्टर रोल और प्रत्येक छह माह में सामाजिक अंकेक्षण अनिवार्य किया गया है। शिकायतों के त्वरित निराकरण के लिए प्रत्येक जिले में एक लोकपाल नियुक्त किया जाएगा।

प्रत्येक ग्राम पंचायत जीआईएस आधारित तकनीक, पीएम गति शक्ति लेयर्स और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर का उपयोग कर विकसित ग्राम पंचायत योजना तैयार करेगी।

सांची और दुग्ध उत्पादकों के लिए 2,973 करोड़ की योजना

कैबिनेट ने प्रदेश के दुग्ध उत्पादकों के हित में सहकारी प्रणाली और सांची ब्रांड के उन्नयन के लिए 2,973 करोड़ रुपये की डेयरी विकास योजना को स्वीकृति दी है।

आगामी पांच वर्षों में सहकारी दुग्ध समितियों का विस्तार 7,331 गांवों से बढ़ाकर 26 हजार गांवों तक किया जाएगा। दुग्ध संकलन 12 लाख किलोग्राम प्रतिदिन से बढ़ाकर 52 लाख किलोग्राम प्रतिदिन करने का लक्ष्य रखा गया है।

इसी प्रकार दुग्ध प्रसंस्करण क्षमता 17.8 लाख लीटर से बढ़ाकर 63.3 लाख लीटर प्रतिदिन और पैकेट दूध बिक्री 7 लाख लीटर प्रतिदिन से बढ़ाकर 35 लाख लीटर प्रतिदिन करने का लक्ष्य है।

भोपाल, उज्जैन और जबलपुर में बनेंगे नए प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय

कैबिनेट ने वर्तमान राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के स्थान पर प्रदेश में तीन पृथक प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय स्थापित करने की मंजूरी दी है।

भोपाल में मध्य भारत प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय, उज्जैन में मालवा प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय तथा जबलपुर में महाकौशल प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय स्थापित किए जाएंगे।

वर्तमान में आरजीपीवी के अंतर्गत 13 पाठ्यक्रम, 585 संस्थाएं और 3 लाख 83 हजार से अधिक विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। नए विश्वविद्यालयों के माध्यम से तकनीकी शिक्षा में क्षेत्रीय संतुलन और बेहतर प्रशासनिक व्यवस्था स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है।

3,225 करोड़ से बनेगा पश्चिम भोपाल बायपास

कैबिनेट ने पश्चिम भोपाल बायपास के 35.61 किलोमीटर लंबे चार लेन मार्ग के निर्माण के लिए 3,225 करोड़ 51 लाख रुपये की पुनरीक्षित स्वीकृति प्रदान की है।

बायपास के निर्माण से जबलपुर और नर्मदापुरम की ओर से इंदौर आने-जाने वाले वाहनों को भोपाल शहर से होकर नहीं गुजरना पड़ेगा और लगभग 21 किलोमीटर की दूरी कम होगी।

मेहलुआ-बीना-खिमलासा-मालथौन मार्ग को मंजूरी

कैबिनेट ने 67.116 किलोमीटर लंबे मेहलुआ-बीना-खिमलासा-मालथौन मार्ग को चार लेन मय पेव्ड शोल्डर के साथ विकसित करने के लिए 2,776 करोड़ 83 लाख रुपये की परियोजना को प्रशासनिक स्वीकृति दी है।

यह मार्ग क्षेत्रीय, अंतरराज्यीय और औद्योगिक यातायात के लिए महत्वपूर्ण होगा तथा बीना क्षेत्र के प्रमुख औद्योगिक केंद्रों और राष्ट्रीय राजमार्गों को बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान करेगा।

स्वास्थ्य संस्थाओं के रखरखाव पर 1,400 करोड़ से अधिक खर्च

मंत्रि-परिषद ने प्रदेश की चिकित्सा संस्थाओं में मशीन एवं उपकरणों के रखरखाव के लिए वर्ष 2026 से 2031 तक 488 करोड़ 41 लाख रुपये की योजना को मंजूरी दी है।

इसके अलावा विभागीय परिसंपत्तियों के संधारण और चिकित्सा संस्थाओं में मॉड्यूलर किचन, मॉड्यूलर ओटी सहित अन्य संरचनाओं के रखरखाव के लिए 915 करोड़ 77 लाख रुपये की स्वीकृति दी गई है।

निवाड़ी समेत चार जिलों को आयुष कार्यालय की सौगात

मंत्रि-परिषद ने नवगठित जिलों निवाड़ी, मऊगंज, पांढुर्णा और मैहर में जिला आयुष कार्यालयों के संचालन के लिए कुल 20 पदों के सृजन को मंजूरी दी है।

चारों जिलों में जिला आयुष अधिकारी, मुख्य लिपिक, लेखापाल और सहायक ग्रेड के पद सृजित किए जाएंगे। इस निर्णय से नवगठित जिलों में आयुष विभाग की प्रशासनिक व्यवस्था मजबूत होने की उम्मीद है।

मूंग का 60 प्रतिशत तक उपार्जन

कैबिनेट ने मुख्यमंत्री के उस निर्णय का भी अनुसमर्थन किया, जिसके तहत पंजीकृत किसानों से मूंग की उपज का 25 प्रतिशत के स्थान पर 60 प्रतिशत तक उपार्जन किया जाएगा।

यह निर्णय प्रदेश के मूंग उत्पादक किसानों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है और इससे अधिक किसानों को समर्थन मूल्य व्यवस्था का लाभ मिलने की उम्मीद है।

कुल मिलाकर मोहन कैबिनेट के इन फैसलों से ग्रामीण रोजगार, सड़क संपर्क, तकनीकी शिक्षा, डेयरी विकास, स्वास्थ्य सुविधाओं और नवगठित जिलों की प्रशासनिक व्यवस्था को नई गति मिलने की संभावना है।