
निवाड़ी। जिले के घूघसी क्षेत्र की वन विभाग चौकी से जुड़ा मामला एक बार फिर चर्चा में है। आरोप है कि बुधवार को लकड़ी से भरे एक ट्रैक्टर-ट्रॉली को वन चौकी पर रोकने के बाद कई घंटे तक रखा गया, लेकिन बाद में बिना स्पष्ट जब्ती कार्रवाई के वाहन को छोड़ दिया गया। मामले को लेकर कथित लेनदेन की चर्चा भी सामने आई है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
जानकारी के अनुसार वन चौकी प्रभारी पुरन लाल अहिरवार द्वारा लकड़ी से भरे ट्रैक्टर-ट्रॉली को रोके जाने की बात सामने आई है। वाहन को चौकी पर रोके जाने के बाद नियमानुसार जांच और कार्रवाई की अपेक्षा थी, लेकिन आरोप है कि कुछ समय बाद वाहन को छोड़ दिया गया। इसको लेकर स्थानीय स्तर पर तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं।
पहले भी वायरल रिकॉर्डिंग को लेकर उठ चुके हैं सवाल
मामले से जुड़े लोगों के अनुसार इससे पहले भी वन विभाग से संबंधित एक कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग वायरल होने का मामला सामने आया था। दावा किया गया था कि रिकॉर्डिंग में वाहन को छोड़ने के संबंध में कथित लेनदेन की बातचीत थी। यह रिकॉर्डिंग वरिष्ठ वन अधिकारियों तक पहुंचने की बात भी कही गई थी। हालांकि, रिकॉर्डिंग की प्रामाणिकता और उसमें कही गई बातों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
नकद और ऑनलाइन लेनदेन की भी चर्चा
मामले को लेकर सूत्रों के हवाले से नकद तथा ऑनलाइन माध्यम से कथित लेनदेन किए जाने की चर्चा भी सामने आ रही है। यदि इस प्रकार का कोई लेनदेन हुआ है तो बैंकिंग रिकॉर्ड और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की जांच से इसकी वास्तविकता स्पष्ट हो सकती है।
वाहन की जांच और कार्रवाई पर सवाल
मामले में मुख्य सवाल यह उठ रहा है कि यदि ट्रैक्टर-ट्रॉली में ले जाई जा रही लकड़ी की वैधता संदिग्ध थी, तो वाहन को चौकी पर रोकने के बाद नियमानुसार जब्ती और जांच की कार्रवाई क्यों नहीं की गई। क्या लकड़ी से संबंधित दस्तावेज, परिवहन अनुमति और वाहन के कागजात की जांच की गई? यदि जांच की गई तो उसका रिकॉर्ड क्या है, यह भी जांच का विषय है।
वहीं, पूर्व में सामने आई कथित रिकॉर्डिंग को लेकर भी यह सवाल उठ रहा है कि यदि मामला वरिष्ठ अधिकारियों के संज्ञान में आया था तो उस समय क्या जांच की गई और उसका परिणाम क्या रहा।
डीएफओ ने रेंजर को दिए जांच के निर्देश
मामले को लेकर जब डीएफओ निवाड़ी से संपर्क किया गया तो उन्होंने बताया कि उन्हें मामले की जानकारी मिल चुकी है। उन्होंने संबंधित रेंजर को मामले की गंभीरता से जांच करने तथा आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
अब डीएफओ के निर्देश के बाद होने वाली जांच पर निगाहें टिकी हैं। जांच में वाहन को छोड़े जाने, लकड़ी के परिवहन से संबंधित दस्तावेजों तथा कथित लेनदेन के आरोपों की वास्तविकता सामने आने की उम्मीद है।
जांच में इन बिंदुओं की हो सकती है पड़ताल
पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के दौरान वन चौकी का रिकॉर्ड, वाहन की एंट्री, लकड़ी से संबंधित दस्तावेज, परिवहन अनुमति, वाहन के कागजात तथा पूर्व में वायरल बताई जा रही रिकॉर्डिंग की प्रामाणिकता की जांच महत्वपूर्ण होगी। यदि ऑनलाइन लेनदेन के आरोप सामने आए हैं तो संबंधित बैंकिंग रिकॉर्ड की जांच भी वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने में मदद कर सकती है।
फिलहाल मामला जांच के दायरे में है और डीएफओ द्वारा दिए गए निर्देशों के बाद रेंजर स्तर पर की जाने वाली जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं, इसका इंतजार है।

