श्रीराम महायज्ञ में मंडप प्रवेश, पीठ स्थापना और देव आवाहन संपन्न

निवाड़ी। मोनी महाराज की दशमी पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित श्रीराम महायज्ञ के दूसरे दिन बुधवार को मंडप प्रवेश, पीठ स्थापना एवं देव आवाहन का धार्मिक अनुष्ठान वैदिक मंत्रोच्चार और विधि-विधान के साथ संपन्न हुआ। इस दौरान सभी यजमान धार्मिक वेशभूषा में शामिल हुए और वैदिक परंपरा के अनुसार पूजा-अर्चना की।
यज्ञाचार्य आचार्य मुनिया महाराज ने बताया कि गुरुवार को यज्ञ में अग्नि स्थापना एवं हवन की प्रक्रिया प्रारंभ होगी। वैदिक परंपरा के अनुसार मंथन विधि से वैश्वानल अग्नि प्रकट की जाएगी। अग्नि प्रकट होने के बाद उसका विधिवत पूजन एवं शुद्धिकरण किया जाएगा और निर्धारित प्रक्रिया पूर्ण होने के पश्चात इसी पवित्र अग्नि का प्रयोग यज्ञ एवं हवन में किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि यज्ञ में अग्नि स्थापना का विशेष महत्व है। वैदिक परंपरा में अग्नि को देवताओं और मनुष्यों के बीच आहुति एवं संदेश पहुंचाने का माध्यम माना गया है। इसी कारण यज्ञ में अग्नि की स्थापना को महत्वपूर्ण धार्मिक संस्कार माना जाता है।
आचार्य मुनिया महाराज के अनुसार मंथन विधि से अग्नि प्रकट होने के बाद उसकी स्थापना, पूजन और शुद्धिकरण की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इसके बाद निर्धारित विधि के अनुसार कव्यांश निकालकर शुद्ध यज्ञ योग्य अग्नि का हवन में प्रयोग किया जाएगा। पूरी प्रक्रिया वैदिक मंत्रों और निर्धारित धार्मिक विधियों के अनुरूप संपन्न होगी।
उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा में अग्नि को पवित्रता, प्रकाश, ऊर्जा और परिवर्तन का प्रतीक माना गया है। यज्ञ में श्रद्धा और विधि-विधान से दी जाने वाली आहुति के माध्यम से सकारात्मकता एवं शुद्धता का भाव उत्पन्न होता है। अग्नि को साक्षी मानकर सनातन परंपरा में अनेक धार्मिक संस्कार भी संपन्न किए जाते हैं।
यज्ञाचार्य ने श्रद्धालुओं से निर्धारित विधि, अनुशासन और श्रद्धा के साथ यज्ञ में सहभागी बनने का आह्वान किया। गुरुवार को अग्नि स्थापना के पश्चात विधिवत हवन प्रक्रिया प्रारंभ होगी।