8 साल में बदली निवाड़ी की तस्वीर, विरासत के साथ विकास की रफ्तार!
कभी नया जिला, अब विकास की नई पहचान की ओर निवाड़ी; सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और पर्यटन में दर्ज हुई प्रगति

निवाड़ी। बुंदेलखंड की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरती पर बसा निवाड़ी जिला आज अपने गठन के आठ वर्ष पूरे कर चुका है। 1 अक्टूबर 2018 को तत्कालीन टीकमगढ़ जिले से अलग होकर अस्तित्व में आए निवाड़ी ने इन आठ वर्षों में प्रशासनिक ढांचे के विस्तार के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, कृषि, उद्योग, महिला सशक्तिकरण, सामाजिक सुरक्षा और पर्यटन के क्षेत्र में विकास की नई तस्वीर पेश की है। जिले की पहचान जहां एक ओर ओरछा की ऐतिहासिक विरासत और धार्मिक आस्था से जुड़ी है, वहीं दूसरी ओर आधुनिक अधोसंरचना और जनकल्याणकारी योजनाओं के विस्तार से विकास की राह भी मजबूत हुई है।
प्रशासनिक ढांचे से लेकर सुविधाओं तक हुआ विस्तार
लगभग 1,170 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल और 4 लाख 4 हजार 807 की आबादी वाले निवाड़ी में वर्तमान में 3 तहसील, 2 जनपद पंचायत, 136 ग्राम पंचायतें, 303 गांव और 5 नगरीय निकाय हैं। सुरक्षा व्यवस्था के लिए 8 पुलिस थाने और 6 पुलिस चौकियां कार्यरत हैं। जिले में 2 विधानसभा क्षेत्र और 1 लोकसभा क्षेत्र शामिल हैं।
शिक्षा के क्षेत्र में 740 स्कूल तथा 9 कॉलेज एवं विश्वविद्यालय संचालित हैं। स्वास्थ्य सेवाओं के लिए जिला चिकित्सालय, सिविल अस्पताल, 2 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, 10 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और 70 उप-स्वास्थ्य केंद्रों का नेटवर्क काम कर रहा है।
ओरछा की विरासत बनी पर्यटन की सबसे बड़ी पहचान
निवाड़ी की विकास यात्रा में पर्यटन का अपना खास स्थान है। श्री रामराजा मंदिर, चतुर्भुज मंदिर, लक्ष्मी नारायण मंदिर, राजा महल, जहांगीर महल, राय प्रवीण महल और गढ़कुंडार किला जिले की ऐतिहासिक पहचान को देश-दुनिया तक पहुंचाते हैं।
ओरछा में भगवान श्रीराम की राजा के रूप में पूजा की परंपरा इसे विशिष्ट धार्मिक पहचान देती है। बेतवा नदी और ओरछा सेंचुरी प्राकृतिक पर्यटन की संभावनाओं को बढ़ाते हैं। भोपाल–ओरछा–चंदेरी पीएमश्री हेली पर्यटन सेवा से भी क्षेत्र को नई कनेक्टिविटी मिली है।
राम विवाह महोत्सव, सावन तीज मेला, नवरात्रि मेला और गढ़कुंडार महोत्सव जैसे आयोजन जिले की सांस्कृतिक पहचान को जीवंत बनाए हुए हैं। आल्हा, फाग, बुंदेली लोकगीत, राई और दीवारी जैसे लोकनृत्य तथा बुंदेली पेंटिंग और टेराकोटा हस्तशिल्प यहां की समृद्ध लोक परंपरा के प्रतीक हैं।
करोड़ों की योजनाओं से हितग्राहियों को मिला सहारा
जिले में केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से पात्र हितग्राहियों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। लाड़ली लक्ष्मी योजना, लाड़ली बहना योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं और संबल योजना के तहत बड़ी संख्या में हितग्राहियों को लाभ मिला है।
संबल योजना के अंतर्गत 1,066 हितग्राहियों को 22 करोड़ 86 लाख रुपये की सहायता दी गई। वहीं प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी के तहत 2,657 हितग्राहियों को 66 करोड़ 42 लाख रुपये की सहायता उपलब्ध कराई गई।
सड़कों और पुलों से गांवों की कनेक्टिविटी मजबूत
ग्रामीण अधोसंरचना को मजबूत करने के लिए भी कई परियोजनाओं पर काम जारी है। ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के अंतर्गत करोड़ों रुपये के कार्य स्वीकृत हुए हैं। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बाऊआ नदी पुल और पथेरी नदी पुल के निर्माण कार्य भी जारी हैं। इन परियोजनाओं से ग्रामीण क्षेत्रों की कनेक्टिविटी बेहतर होने की उम्मीद है।
एमएसएमई से रोजगार तक, उद्योगों ने पकड़ी रफ्तार
निवाड़ी में औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार के साथ रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं। वर्ष 2025-26 में 2,052 एमएसएमई इकाइयां पंजीकृत हुईं। वित्तीय वर्ष 2023-26 के दौरान कुल 4,467 एमएसएमई इकाइयों के पंजीयन के साथ 6,212 रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए गए।
विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में करोड़ों रुपये के निवेश और रोजगार से जुड़ी परियोजनाएं भी सामने आई हैं। जेरे औद्योगिक क्षेत्र में 27 हेक्टेयर क्षेत्र में 105 इकाइयों के लिए प्रस्तावित निवेश के साथ रोजगार सृजन का लक्ष्य रखा गया है।
बोर्ड परीक्षाओं में भी दिखा सुधार
शिक्षा के क्षेत्र में जिले के परीक्षा परिणामों में भी सुधार दर्ज किया गया है। कक्षा 10वीं का परीक्षा परिणाम 50.92 प्रतिशत से बढ़कर 70.59 प्रतिशत और कक्षा 12वीं का परिणाम 33 प्रतिशत से बढ़कर 67.17 प्रतिशत हुआ है।
स्कूलों में आधुनिक शिक्षण सुविधाओं का विस्तार करते हुए हाईस्कूल और हायर सेकेंडरी स्कूलों में इंटरैक्टिव पैनल लगाए गए हैं। कई विद्यालयों में आईसीटी लैब भी स्थापित की गई हैं।
शेडनेट में रंगीन शिमला मिर्च, किसान ने कमाए लाखों
कृषि क्षेत्र में नवाचार का उदाहरण ग्राम रजपुरा के किसान भरत राजपूत ने पेश किया है। अटल भू-जल योजना के तहत शेडनेट हाउस के लिए उन्हें 17 लाख रुपये का अनुदान मिला। रंगीन शिमला मिर्च की खेती से उन्होंने 3,500 किलोग्राम उत्पादन प्राप्त किया और 10.50 लाख रुपये की कुल आय के साथ 8.50 लाख रुपये वार्षिक शुद्ध आय अर्जित की।
महिलाओं के हाथों में आर्थिक मजबूती
महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में पिछले दो वर्षों में 2,227 स्व-सहायता समूहों से 21,262 परिवार जुड़े हैं। 2,221 समूहों को क्रेडिट लिंकेज मिला है। समूहों को रिवॉल्विंग फंड और सामुदायिक निधि के रूप में 12.74 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए गए हैं। बैंक समन्वय के माध्यम से करीब 10 करोड़ रुपये का क्रेडिट लिंकेज भी हुआ है।
वंचित वर्गों के लिए भी योजनाओं का विस्तार
जिले में सामुदायिक वन अधिकार पत्र, आदि सेवा केंद्र और प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना के माध्यम से भी कार्य किए गए हैं। 496 वन अधिकार दावों में से 66 पात्र दावों पर अधिकार पत्र प्रदान किए गए हैं।
जिले के 18 छात्रावासों में 870 सीटें उपलब्ध हैं। पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति के 1,776 स्वीकृत आवेदनों का 100 प्रतिशत भुगतान किया गया है। पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक विद्यार्थियों को भी करोड़ों रुपये की सहायता उपलब्ध कराई गई है।
नए कलेक्ट्रेट से जिला अस्पताल तक बड़ी सौगात
निवाड़ी की विकास यात्रा में बड़ी परियोजनाओं का भी अहम योगदान रहा है। 15 अक्टूबर 2025 को श्री रामराजा लोक के द्वितीय चरण का शिलान्यास किया गया। वहीं 26 जुलाई 2026 को संयुक्त नवीन कलेक्ट्रेट भवन और जिला चिकित्सालय का लोकार्पण हुआ। इस दौरान करीब 193 करोड़ रुपये की लागत के 59 विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन किया गया।
आठ साल बाद सवाल नहीं, अब अगली मंजिल की चुनौती
निवाड़ी ने अपने गठन के आठ वर्षों में प्रशासनिक व्यवस्था से लेकर शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, रोजगार, कृषि और महिला सशक्तिकरण तक कई क्षेत्रों में विकास के आंकड़े दर्ज किए हैं। अब जिले के सामने अगली चुनौती इन योजनाओं और परियोजनाओं को और व्यापक स्तर तक पहुंचाने की है।
ऐतिहासिक विरासत को सहेजते हुए पर्यटन को बढ़ावा देना, कृषि आधारित उद्योगों को विस्तार देना, स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ाना, युवाओं को कौशल से जोड़ना और स्वास्थ्य-शिक्षा सुविधाओं को और मजबूत करना आने वाले वर्षों में जिले के विकास की दिशा तय कर सकता है।
आठ साल पूरे कर चुका निवाड़ी अब सिर्फ नया जिला नहीं, बल्कि अपनी विरासत और विकास—दोनों को साथ लेकर आगे बढ़ता बुंदेलखंड का उभरता चेहरा बनने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है।