कमिश्नर के आदेश के बाद भी जमीन कब्जामुक्त नहीं, चौथी बार जनसुनवाई में पहुंचे पीड़ित भाई

कमिश्नर के आदेश के बाद भी जमीन कब्जामुक्त नहीं, चौथी बार जनसुनवाई में पहुंचे पीड़ित भाई
मंगलवार की जनसुनवाई बनी कागजों की कार्रवाई

पृथ्वीपुर। जनसुनवाई में बार-बार आवेदन देने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं होने का मामला सामने आया है। करगुवा निवासी दो भाइयों का कहना है कि राजस्व कमिश्नर सागर के आदेश के बाद भी उनकी जमीन को कथित कब्जे से मुक्त नहीं कराया गया। मामले में पीड़ित भाई 6 अक्टूबर को चौथी बार निवाड़ी कलेक्टर की जनसुनवाई में आवेदन लेकर पहुंचे।
पीड़ित हद्दू एवं मुल्ली पुत्र लटोरे कुशवाहा निवासी करगुवा, थाना पृथ्वीपुर ने बताया कि उनकी पटेती जमीन खसरा नंबर 603/2/1/1, रकबा 0.034 हेक्टेयर पर भैयन कुशवाहा आदि द्वारा कथित रूप से कब्जा किया गया है। पीड़ितों के अनुसार इस मामले में पृथ्वीपुर तहसील एवं एसडीएम न्यायालय से उनके पक्ष में फैसला हुआ था। इसके बाद कब्जाधारियों द्वारा कमिश्नर सागर की अदालत में अपील की गई, जिसे वहां से खारिज कर दिया गया।
पीड़ितों का कहना है कि कमिश्नर सागर द्वारा 12 मई 2026 को आदेश जारी कर तहसीलदार को जमीन को कब्जाधारियों से मुक्त कराने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद अब तक उन्हें जमीन का कब्जा नहीं मिल सका है।
चार बार कलेक्टर की जनसुनवाई में दे चुके आवेदन
हद्दू और मुल्ली ने बताया कि कमिश्नर के आदेश के बाद से वे चार बार कलेक्टर की जनसुनवाई में तथा तीन बार पृथ्वीपुर एसडीएम की जनसुनवाई में आवेदन दे चुके हैं। उनका आरोप है कि बार-बार आवेदन देने के बावजूद उनकी समस्या का निराकरण नहीं हुआ। मंगलवार को दोनों भाई फिर अपनी फरियाद लेकर कलेक्टर की जनसुनवाई में पहुंचे।
पीड़ितों ने आरोप लगाया कि कलेक्टर की जनसुनवाई के दौरान उन्हें एसडीएम के पास जाकर मामला दिखाने के लिए कहा गया था, लेकिन वहां पहुंचने पर उनकी सुनवाई नहीं हुई। हालांकि इन आरोपों पर संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों का पक्ष सामने नहीं आया है।
जमीन कब्जामुक्त नहीं हुई तो धरने की चेतावनी
पीड़ित दोनों भाइयों ने कहा कि वे लंबे समय से अपनी जमीन का कब्जा पाने के लिए राजस्व अधिकारियों और न्यायालयों के चक्कर लगा रहे हैं। उनका कहना है कि यदि शीघ्र ही कमिश्नर के आदेश का पालन कर जमीन कब्जामुक्त नहीं कराई गई तो वे तहसील कार्यालय के सामने धरने पर बैठने के लिए मजबूर होंगे।
मामले में अब यह देखना होगा कि संबंधित राजस्व अधिकारी कमिश्नर के आदेश के अनुपालन में क्या कार्रवाई करते हैं और पीड़ितों की शिकायत का निराकरण कब तक होता है।