
ओरछा/निवाड़ी। ऐतिहासिक नगरी ओरछा की कला, संस्कृति और विरासत संरक्षण को लेकर भारतीय राष्ट्रीय कला एवं सांस्कृतिक विरासत न्यास (INTACH) ने ओरछा-निवाड़ी चैप्टर में नई जिम्मेदारियां सौंपी हैं। INTACH ने परमानन्द केवट को चैप्टर का कन्वीनर (संयोजक) तथा उमा पाठक को को-कन्वीनर (सह-संयोजक) नियुक्त किया है।
दोनों नवनियुक्त पदाधिकारियों को नियुक्ति पत्र INTACH के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक सिंह ठाकुर एवं राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मालविका पठानिया ने सौंपे। नियुक्ति के अवसर पर ग्रुप कैप्टन अरविंद शुक्ला, डायरेक्टर—चैप्टर डिवीजन, INTACH एवं चैप्टर्स एडवाइजरी कमेटी के चेयरमैन तथा INTACH राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य नीलकमल माहेश्वरी भी मौजूद रहे। पदाधिकारियों को नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं दी गईं।
चार दशक से विरासत संरक्षण में सक्रिय है INTACH
INTACH देश की प्रमुख विरासत संरक्षण संस्थाओं में शामिल है। संस्था चार दशक से अधिक समय से कला, संस्कृति, पर्यावरण, इतिहास, पर्यटन और विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन के क्षेत्र में कार्य कर रही है। ओरछा की ऐतिहासिक पहचान को देश-दुनिया के सामने लाने में भी संस्था की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
INTACH के अनुसार, करीब 30 वर्ष पहले ओरछा की ऐतिहासिक इमारतों की लिस्टिंग और दस्तावेजीकरण का कार्य किया गया था। ऐतिहासिक धरोहरों को सूचीबद्ध करने और उनके महत्व को सामने लाने के इन प्रयासों से ओरछा की विरासत को व्यापक पहचान दिलाने में मदद मिली।
यूनेस्को से जुड़े संरक्षण प्रयासों में भी रही भागीदारी
ओरछा की विरासत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में भी INTACH की भागीदारी रही है। यूनेस्को से संबंधित विरासत संरक्षण के प्रयासों में संस्था की भूमिका रही है। ऐसे में ओरछा-निवाड़ी चैप्टर की नई टीम के सामने क्षेत्र की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और स्थापत्य विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होगी।
तीन वर्ष के लिए नियुक्त हुए परमानन्द केवट
INTACH के सदस्य सचिव एवं सेवानिवृत्त IAS अधिकारी रवींद्र सिंह द्वारा 5 अक्टूबर 2026 को जारी आधिकारिक नियुक्ति पत्र में परमानन्द केवट की नियुक्ति की पुष्टि की गई है। नियुक्ति पत्र के अनुसार उन्हें तीन वर्ष की अवधि के लिए ओरछा चैप्टर का कन्वीनर नियुक्त किया गया है। वहीं, उमा पाठक को को-कन्वीनर के रूप में अधिकृत किया गया है।
नई जिम्मेदारी मिलने के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि ओरछा-निवाड़ी क्षेत्र की ऐतिहासिक धरोहरों, स्थापत्य, कला, संस्कृति और पर्यावरण से जुड़े संरक्षण कार्यों को नई गति मिलेगी। साथ ही क्षेत्र की समृद्ध विरासत को संरक्षित कर आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने की दिशा में भी नई टीम महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

