
निवाड़ी। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) के तहत स्वास्थ्य विभाग की तत्परता से जन्मजात विकार क्लब फुट से पीड़ित बेबी राधा को समय पर उपचार उपलब्ध कराया गया। पृथ्वीपुर विकासखंड के दुर्गापुर अछरुमाता निवासी बच्ची के स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान RBSK टीम ने उसके पैर में जन्मजात विकार की पहचान की। इसके बाद बिना देरी किए उसे जिला चिकित्सालय झांसी रेफर किया गया, जहां विशेषज्ञ चिकित्सकों ने आवश्यक जांच और उपचार किया। उपचार के बाद बच्ची के पैर की स्थिति में संतोषजनक सुधार देखा गया है।
स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान हुई क्लब फुट की पहचान
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत बच्चों में जन्मजात विकारों, बीमारियों, पोषण संबंधी कमियों और विकासात्मक समस्याओं की समय पर पहचान कर उन्हें उपचार उपलब्ध कराया जाता है। इसी क्रम में नियमित स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान RBSK टीम को बेबी राधा में क्लब फुट की समस्या का पता चला।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए RBSK टीम के चिकित्सक डॉ. अभिषेक पस्तोर एवं डॉ. बिमलेश अहिरवार ने RBSK प्रभारी डॉ. हृदेश विश्वकर्मा के मार्गदर्शन में बच्ची को जिला चिकित्सालय झांसी रेफर किया। वहां विशेषज्ञ चिकित्सकों ने बच्ची का परीक्षण कर आवश्यक उपचार शुरू किया।
अनुष्का फाउंडेशन के सहयोग से हुई कास्टिंग
जिला चिकित्सालय झांसी में अनुष्का फाउंडेशन के सहयोग से बेबी राधा के क्लब फुट का उपचार किया गया। इसके तहत आवश्यक कास्टिंग की गई, जिसके बाद बच्ची के पैर की स्थिति में संतोषजनक सुधार सामने आया। उपचार के साथ ही बच्ची के माता-पिता को देखभाल, पोषण और जरूरी सावधानियों के संबंध में भी जानकारी दी गई।
क्लब फुट एक जन्मजात विकार है, जिसमें बच्चे का पैर सामान्य स्थिति से मुड़ा हुआ होता है। समय पर इसकी पहचान और विशेषज्ञों की देखरेख में उपचार शुरू होने से बच्चे के पैर की स्थिति में सुधार की संभावना बढ़ती है। बेबी राधा का मामला समय पर स्वास्थ्य परीक्षण, उचित रेफरल और उपचार के महत्व को दर्शाता है।
स्वास्थ्य विभाग के समन्वित प्रयासों से मिली सफलता
इस प्रकरण में कलेक्टर श्रीमती जमुना भिड़े के मार्गदर्शन में स्वास्थ्य विभाग की निगरानी और RBSK टीम के समन्वित प्रयासों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अनिल झामनानी, खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. गजेंद्र निरंजन, RBSK प्रभारी डॉ. हृदेश विश्वकर्मा तथा चिकित्सक डॉ. अभिषेक पस्तोर और डॉ. बिमलेश अहिरवार ने उपचार की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के माध्यम से बच्चों के स्वास्थ्य की नियमित जांच कर जरूरत के अनुसार उन्हें उच्च स्वास्थ्य संस्थानों और विशेषज्ञ चिकित्सकों तक पहुंचाया जाता है। उपचार के बाद बच्चों के फॉलो-अप पर भी ध्यान दिया जाता है।
बच्ची के उपचार से खुश माता-पिता ने जताया आभार
बेबी राधा के उपचार के बाद उसके माता-पिता श्रीमती राधा रैकवार और श्री कमलेश रैकवार ने प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, जिला प्रशासन निवाड़ी, कलेक्टर श्रीमती जमुना भिड़े और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के प्रति आभार जताया।
माता-पिता ने कहा कि RBSK टीम ने समय पर उनकी बच्ची की समस्या की पहचान कर उपचार के लिए रेफर किया, जिससे उसे बेहतर इलाज मिल सका। उन्होंने शासन की स्वास्थ्य योजनाओं और स्वास्थ्य विभाग की टीम के प्रयासों की सराहना की।
बच्चों की सेहत की समय पर जांच पर जोर
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों में जन्मजात विकारों, बीमारियों, पोषण संबंधी कमियों तथा विकासात्मक विलंब की शीघ्र पहचान कर उन्हें उचित उपचार उपलब्ध कराना है। इसके अंतर्गत बच्चों की नियमित स्क्रीनिंग की जाती है। आवश्यकता पड़ने पर उन्हें विशेषज्ञ अस्पतालों में रेफर कर उपचार और फॉलो-अप की व्यवस्था की जाती है।
बेबी राधा का मामला इस बात का उदाहरण है कि समय पर स्वास्थ्य जांच, विकार की पहचान और उचित उपचार से बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य एवं विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया जा सकता है। ऐसे में अभिभावकों के लिए भी जरूरी है कि वे बच्चों के स्वास्थ्य में किसी असामान्यता को नजरअंदाज न करें और समय पर चिकित्सकीय सलाह लें।

