निवाड़ी के चचावली में प्राकृतिक खेती की पहल, बायो रिसोर्स सेंटर में रोजाना तैयार हो रहा 200 लीटर जीवामृत

निवाड़ी के चचावली में प्राकृतिक खेती की पहल, बायो रिसोर्स सेंटर में रोजाना तैयार हो रहा 200 लीटर जीवामृत
अधिकारियों ने किया फौजी कृषि फार्म का निरीक्षण, किसानों को रासायनिक खाद छोड़ प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए किया प्रेरित

निवाड़ी। जिले में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के अंतर्गत विभिन्न प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में विकासखंड निवाड़ी के ग्राम चचावली में स्थित कृषक लालाराम सूत्रकार के फौजी कृषि फार्म पर स्थापित बायो रिसोर्स सेंटर (बीआरसी) का वरिष्ठ अधिकारियों ने औचक निरीक्षण किया। इस दौरान अधिकारियों ने प्राकृतिक पद्धति से की जा रही खेती का अवलोकन किया और किसानों को खेती की लागत कम करने के साथ पर्यावरण संरक्षण के लिए प्राकृतिक खेती अपनाने की सलाह दी।
निरीक्षण परियोजना संचालक (आत्मा) भरत राजवंशी एवं विकासखंड तकनीकी सहायक जे.पी. यादव द्वारा किया गया। इस दौरान स्थानीय किसान भी उपस्थित रहे। अधिकारियों ने फार्म पर प्राकृतिक एवं जैविक पद्धति से उगाई जा रही फसलों का निरीक्षण कर उनकी प्रगति की जानकारी ली।
बासमती धान, अरहर और संकर ज्वार की फसलों का अवलोकन
फौजी कृषि फार्म पर प्राकृतिक तरीके से उगाई जा रही बासमती धान की फसल का अधिकारियों ने बारीकी से अवलोकन किया। इसके साथ ही फार्म पर संचालित बागवानी, अरहर की खेती तथा संकर ज्वार की फसलों की स्थिति भी देखी। अधिकारियों ने प्राकृतिक खेती की पद्धतियों के माध्यम से फसलों के उत्पादन और विकास के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी ली।
बायो रिसोर्स सेंटर में रोजाना बन रहा 200 लीटर जीवामृत
निरीक्षण के दौरान बताया गया कि फौजी कृषि फार्म पर स्थापित बायो रिसोर्स सेंटर में प्रतिदिन लगभग 200 लीटर जीवामृत तैयार किया जा रहा है। इसका उपयोग धान, मूंगफली, अरहर सहित विभिन्न फसलों और बागवानी में किया जा रहा है।
जीवामृत प्राकृतिक खेती में उपयोग होने वाला एक महत्वपूर्ण जैविक घोल है, जिसका प्रयोग मिट्टी की जैविक गतिविधियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया जाता है। इसके उपयोग और तैयार करने की विधि के संबंध में अधिकारियों ने उपस्थित किसानों को विस्तार से जानकारी दी।
रासायनिक खादों पर निर्भरता कम करने की सलाह
अधिकारियों ने किसानों को प्राकृतिक खेती की उन्नत तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने जीवामृत तैयार करने, उसके उचित उपयोग तथा फसलों में प्राकृतिक खेती की विधियों को अपनाने के संबंध में जानकारी साझा की।
उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती अपनाने से रासायनिक खादों पर निर्भरता कम करने और खेती की लागत घटाने में मदद मिल सकती है। इसके साथ ही मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने तथा पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी सकारात्मक परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।
दूसरे किसानों को भी प्रेरित कर रहे लालाराम सूत्रकार
ग्राम चचावली के कृषक लालाराम सूत्रकार अपने फौजी कृषि फार्म पर प्राकृतिक खेती की तकनीकों को अपनाकर क्षेत्र के अन्य किसानों को भी इसके लिए प्रेरित कर रहे हैं। वे अपने अनुभवों के माध्यम से साथी किसानों को रासायनिक खेती पर निर्भरता कम करने और प्राकृतिक खेती की पद्धतियां अपनाने के लिए जागरूक कर रहे हैं।
राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के अंतर्गत इस तरह के प्रयासों से किसानों तक प्राकृतिक खेती की तकनीकों की जानकारी पहुंचाने और उन्हें वैकल्पिक कृषि पद्धतियों के प्रति प्रोत्साहित करने में मदद मिल रही है। निरीक्षण के दौरान क्षेत्र के कई प्रगतिशील किसान उपस्थित रहे।