
निवाड़ी। नगर के तिगैला रोड स्थित प्राचीन बड़ी देवी माता मंदिर में शारदीय नवरात्रि के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। सुबह से ही महिला और पुरुष श्रद्धालु माता रानी को जल अर्पित करने और दर्शन करने पहुंच रहे हैं। लगभग 128 वर्ष पुराने इस मंदिर से नगरवासियों के साथ आसपास के क्षेत्र के लोगों की गहरी आस्था जुड़ी हुई है। मंदिर की पूजा-अर्चना और देखरेख की जिम्मेदारी तिवारी परिवार की चौथी पीढ़ी निभा रही है। नवरात्रि के अवसर पर मंदिर परिसर में लगने वाला मेला भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
नगर के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल बड़ी देवी माता मंदिर में धार्मिक और सामाजिक आयोजनों की भी विशेष परंपरा है। नगर में आयोजित होने वाले अनेक धार्मिक कार्यक्रमों की शोभायात्राओं के साथ विभिन्न आयोजनों का शुभारंभ भी इसी मंदिर परिसर से किया जाता है। मंदिर परिसर में मां जगदंबा के साथ भगवान हनुमान जी, भगवान भोलेनाथ और अन्य देवी-देवताओं के मंदिर भी स्थापित हैं।
1897 में हुई थी मंदिर की स्थापना
बुंदेलखंड के प्रसिद्ध श्रीमद्भागवत कथा वाचक पंडित सत्यदेव तिवारी ने मंदिर के इतिहास की जानकारी देते हुए बताया कि बड़ी देवी माता मंदिर की स्थापना वर्ष 1897 में हुई थी। उस समय अंग्रेजी शासनकाल में जगदंबा प्रसाद निगम मजिस्ट्रेट के पद पर पदस्थ थे। उनके यहां संतान नहीं थी। पंडित सत्यदेव तिवारी के अनुसार, उनके दादाजी स्वर्गीय मनीराम तिवारी ने निगम के यहां दुर्गा सप्तशती का पाठ किया था। इसके बाद उन्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई। इसके उपरांत मनीराम तिवारी के कहने पर वर्ष 1897 में मां जगदंबा के मंदिर की स्थापना कराई गई।
उन्होंने बताया कि शुरुआती दौर में यह मंदिर जगदंबा माता मंदिर के नाम से प्रसिद्ध था। मंदिर में पूजा-पाठ और सेवा की जिम्मेदारी उनके दादाजी मनीराम तिवारी निभाते थे। उनके निधन के बाद उनके पिता स्वर्गीय बाबूलाल तिवारी ने यह जिम्मेदारी संभाली। पिता के निधन के बाद से पंडित सत्यदेव तिवारी मंदिर में माता रानी की सेवा कर रहे हैं। उनकी अनुपस्थिति में उनके पुत्र अनुकूल तिवारी भी मंदिर में सेवाएं देते हैं।
पंडित सत्यदेव तिवारी का कहना है कि मंदिर की सेवा केवल एक परिवार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें नगरवासियों का भी महत्वपूर्ण योगदान है। श्रद्धालुओं के सहयोग से समय के साथ मंदिर परिसर का विस्तार हुआ और यह पूरे क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल हो गया।
दोनों नवरात्रि में लगता है मेला
बड़ी देवी माता मंदिर में चैत्र और शारदीय नवरात्रि के दौरान विशेष धार्मिक आयोजन होते हैं। इन दिनों सुबह करीब चार बजे से ही श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो जाता है। भक्त माता रानी को जल अर्पित कर पूजा-अर्चना करते हैं और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
दोनों नवरात्रि में मंदिर परिसर में मेला भी आयोजित होता है। पंडित सत्यदेव तिवारी के अनुसार, पहले मेले का आयोजन छोटे स्तर पर होता था, लेकिन समय के साथ इसका विस्तार हुआ है। मेले के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा और व्यवस्था में पुलिस प्रशासन तथा नगरीय प्रशासन का सहयोग भी मिलता है।
200 वर्ष से अधिक पुराना बताया जाता है बरगद का वृक्ष
मंदिर परिसर में स्थित विशाल बरगद का वृक्ष भी श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। पंडित सत्यदेव तिवारी के अनुसार, मंदिर की स्थापना लगभग 128 वर्ष पहले हुई थी, जबकि परिसर में स्थित बरगद का वृक्ष करीब 200 वर्ष से अधिक पुराना बताया जाता है।
मान्यता है कि संतान प्राप्ति की कामना करने वाले श्रद्धालु इस वृक्ष की परिक्रमा कर इसकी शाखा पर कलावा बांधते हैं और माता रानी से प्रार्थना करते हैं। श्रद्धालुओं के बीच इस वृक्ष की विशेष धार्मिक मान्यता है। विशाल बरगद और प्राचीन मंदिर की परंपरा बड़ी देवी माता मंदिर को नगर की धार्मिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाती है।

