
निवाड़ी। जिला मुख्यालय पर नौ दिनों तक धूमधाम और श्रद्धा के साथ मनाए गए नवरात्रि महोत्सव का समापन विजयादशमी पर देवी प्रतिमाओं के विसर्जन के साथ हुआ। नगर में करीब 40 स्थानों पर स्थापित देवी प्रतिमाओं का बड़े तालाब, अड़जार बांध और राजापुर तालाब में विसर्जन किया गया। विसर्जन का सिलसिला देर रात तक जारी रहने के कारण दशहरा पर्व की रौनक फीकी नजर आई। वहीं, घर-घर जाकर एक-दूसरे को दशहरे की राम-राम कहने और बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद लेने की परंपरा भी धीरे-धीरे विलुप्त होती दिखाई दे रही है।
शारदीय नवरात्रि के दौरान नगर के विभिन्न स्थानों पर देवी प्रतिमाएं स्थापित की गई थीं। नौ दिनों तक पूजा-अर्चना और धार्मिक आयोजनों के बाद विजयादशमी पर विधि-विधान के साथ प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया। अधिकांश लोग विसर्जन की व्यवस्थाओं में व्यस्त रहे। वहीं, नगरीय निकाय और पुलिस प्रशासन के अधिकारी-कर्मचारी भी देर रात तक व्यवस्थाएं संभालने में जुटे रहे। इसके चलते दशहरा पर्व पर नगर में पहले जैसी चहल-पहल नजर नहीं आई।
विसर्जन स्थलों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
देवी प्रतिमाओं के विसर्जन को सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने के लिए पुलिस प्रशासन ने तीन प्रमुख स्थल निर्धारित किए थे। इनमें नगर का बड़ा तालाब, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की सीमा पर स्थित अड़जार बांध तथा राजापुर तालाब शामिल रहे। तीनों स्थानों पर सुरक्षा और बिजली की पर्याप्त व्यवस्था की गई थी।
प्रशासन की व्यवस्था के अनुसार, नवदुर्गा समितियों ने अपनी-अपनी प्रतिमाओं को निर्धारित विसर्जन स्थलों तक पहुंचाया। जलाशयों से सुरक्षित दूरी पर प्रतिमाओं की विधिवत पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद प्रशासन द्वारा नियुक्त गोताखोरों की मदद से प्रतिमाओं का विसर्जन कराया गया। देर रात तक चले विसर्जन के दौरान प्रशासनिक अमला सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने में जुटा रहा।
आधुनिकता के दौर में पीछे छूट रही दशहरे की राम-राम
विजयादशमी का पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान श्रीराम ने रावण का वध कर लंका पर विजय प्राप्त की थी, जबकि मां दुर्गा ने महिषासुर का संहार किया था। इसी उपलक्ष्य में दशहरा मनाया जाता है।
बुंदेलखंड सहित क्षेत्र के कई हिस्सों में दशहरे पर घर-घर जाकर परिचितों और रिश्तेदारों को राम-राम कहने तथा बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद लेने की परंपरा रही है। लेकिन बदलती जीवनशैली, मोबाइल के बढ़ते चलन और नवरात्रि के बाद प्रतिमा विसर्जन की व्यस्तताओं के चलते यह परंपरा अब कमजोर पड़ती दिखाई दे रही है। निवाड़ी नगर में भी इस बार देर रात तक विसर्जन जारी रहने से लोगों को पारंपरिक तरीके से दशहरा मनाने का कम अवसर मिला।
मुड़ारा गांव में आधी रात को निभाई गई परंपरा
एक ओर जहां आधुनिकता के दौर में दशहरे पर घर-घर जाकर राम-राम कहने की परंपरा कमजोर पड़ रही है, वहीं जिला मुख्यालय के समीप स्थित ग्राम मुड़ारा में आज भी इस परंपरा का निर्वहन किया जा रहा है।
गांव में वर्षों से चली आ रही परंपरा के अनुसार, दशहरे की रात ठीक 12 बजे ग्रामवासी एक-दूसरे के घर पहुंचते हैं और दशहरे की राम-राम कहकर बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद लेते हैं। बीते रोज भी ग्रामीणों ने इस परंपरा को निभाते हुए घर-घर जाकर एक-दूसरे को दशहरे की शुभकामनाएं दीं और बुजुर्गों का आशीर्वाद प्राप्त किया।
मुड़ारा गांव की यह परंपरा सामाजिक मेल-मिलाप, आपसी सद्भाव और बुजुर्गों के प्रति सम्मान की भावना को जीवंत बनाए हुए है। ऐसे में यह गांव बदलते समय के बीच अपनी सांस्कृतिक विरासत को सहेजने की मिसाल पेश कर रहा है।

