
मध्य प्रदेश की पहचान केवल अपनी ऐतिहासिक और धार्मिक विरासत से नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और आपसी भाईचारे से भी है। यहां अलग-अलग धर्मों और समुदायों के लोग लंबे समय से एक-दूसरे के सुख-दुख में सहभागी बनते आए हैं। यही परंपरा प्रदेश की सामाजिक शक्ति है।
निवाड़ी जिला भी इस साझा संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ओरछा में श्री रामराजा सरकार की धार्मिक परंपरा से लेकर गांव-कस्बों के स्थानीय मंदिरों और दरगाहों तक, यहां धार्मिक और सांस्कृतिक जीवन की विविधता दिखाई देती है। निवाड़ी में बड़ी माता मंदिर, जैन मंदिर जैसे धार्मिक स्थल हैं, वहीं बरईपुरा में हजरत सय्यद वली (खड़ौरा वाले बाबा) की दरगाह और पृथ्वीपुर के डुमडुमा में हाजी मलंग दरगाह एवं मस्जिद जैसे मुस्लिम धार्मिक स्थल भी स्थानीय धार्मिक परिदृश्य का हिस्सा हैं।
इन स्थानों की मौजूदगी अपने आप में निवाड़ी की विविध सामाजिक संरचना को सामने रखती है।
निवाड़ी में आस्था अलग, अपनापन साझा
निवाड़ी और बुंदेलखंड की सामाजिक जिंदगी में धार्मिक पहचान के साथ-साथ मोहल्ले, गांव और पड़ोस के रिश्तों की भी बड़ी भूमिका है। मोहर्रम का जुलूस हो या ताजिया इस अवसर पर कई हिंदू परिवारों द्वारा शेली पहनी जाती है जो विसर्जन के जुलूस में ताजिया पर चढ़ाकर रेवड़ी का प्रसाद चढ़ाया जाता है और अपनी क्षमता अनुसार राशि भी दान की जाती है यह भी भाईचारे का महत्वपूर्ण उदाहरण है। किसी के घर शादी हो, धार्मिक आयोजन हो या कोई कठिन परिस्थिति—स्थानीय समाज में एक-दूसरे के काम आने की परंपरा ही सामाजिक रिश्तों को मजबूत करती है।
बरईपुरा क्षेत्र में दर्ज हजरत सय्यद वली की दरगाह और पृथ्वीपुर क्षेत्र के दुमदुमा की हाजी मलंग दरगाह जैसे स्थल यह दिखाते हैं कि निवाड़ी जिले का धार्मिक भूगोल केवल एक समुदाय तक सीमित नहीं है। ऐसे स्थलों के आसपास रहने वाले लोगों के रोजमर्रा के सामाजिक संबंध धार्मिक सीमाओं से कहीं अधिक व्यापक होते हैं।
इसलिए निवाड़ी के भाईचारे की कहानी को केवल किसी एक बड़े आयोजन से नहीं, बल्कि पड़ोसी के सुख-दुख में शामिल होने, एक-दूसरे के धार्मिक विश्वास का सम्मान करने और जरूरत के समय साथ खड़े होने की रोजमर्रा की संस्कृति से समझना चाहिए।
त्योहारों में दिखता है आपसी सम्मान
हिंदू-मुस्लिम भाईचारे की सबसे सुंदर तस्वीर धार्मिक त्योहारों और सामाजिक आयोजनों के दौरान दिखाई देती है। नगर में रामनवमी महोत्सव भी बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है जिसमें मुस्लिम भाइयों द्वारा शोभायात्रा का बड़े जोर से स्वागत कर हिंदू मुस्लिम एकता का परिचय दिया जाता है।
दिवाली तथा अन्य किसी हिंदू त्योहारों पर हिंदू परिवारों के यहां से अपने मुस्लिम पड़ोसियों के घर प्रसाद के रूप में मिठाई या अन्य पकवान भेजे जाते हैं वहीं मुस्लिम परिवारों के यहां से भी ईद के त्योहार पर मीठी सेवइयां या अन्य पकवान भेजे जाते हैं जो अपने आप में भाईचारे को बढ़ावा देने के लिए अहम माना जाता है। निवाड़ी नगर के सभ्रांत नागरिक मुस्लिम परिवार से मास्टर शमसुद्दीन खान है जो हमेशा रचनात्मक कार्यों में अपना सहयोग देते हैं, ये बहुत अच्छे कवि एवं गीतकार भी हैं इनके द्वारा कुछ समय पहले एक ताजिया बनाया गया था जिसकी लंबाई 110 फुट के लगभग थी इस विशाल ताजिया को खड़ा करने के लिए हिंदू भाइयों ने क्रेन की व्यवस्था कर न केवल ताजिया को खड़ा कराया बल्कि पूरी देखरेख की, वही मास्टर दीन खान जी जो राष्ट्रपति से पुरुस्कृत हैं इनके द्वारा अच्छे तरीके से जन्म कुंडली का मिलान किया जाता है जो अपने आप में एक मिसाल है इन्हें कई प्रकार के मंत्र कंठस्थ है तथा आध्यात्म का भी अच्छा ज्ञान है जितना यह अली को मानते हैं उतना ही बजरंगबली को भी मानते हैं।
ईद पर हिंदू परिवारों द्वारा मुस्लिम मित्रों और पड़ोसियों को शुभकामनाएं देना तथा दीपावली, होली, नवरात्रि और गणेश उत्सव जैसे अवसरों पर मुस्लिम समुदाय के लोगों द्वारा अपने हिंदू मित्रों की खुशियों में शामिल होना सामाजिक सद्भाव को मजबूत करता है।
कई स्थानों पर धार्मिक जुलूसों का दूसरे समुदाय द्वारा स्वागत किया जाता है। कहीं मुस्लिम भाई हिंदू धार्मिक जुलूसों के लिए पानी और प्रसाद की व्यवस्था करते हैं, तो कहीं हिंदू समुदाय के लोग मुस्लिम धार्मिक आयोजनों में सहयोग करते हैं। ये छोटे-छोटे प्रयास समाज को बड़ा संदेश देते हैं कि आस्था अलग हो सकती है, लेकिन इंसानियत और रिश्ते साझा हो सकते हैं।
मुश्किल समय में साथ खड़ा होना ही सच्चा भाईचारा
भाईचारा केवल त्योहारों तक सीमित नहीं होना चाहिए। इसकी असली परीक्षा तब होती है जब समाज किसी कठिन परिस्थिति से गुजर रहा हो।
किसी परिवार में बीमारी हो, दुर्घटना हो, आर्थिक संकट हो या प्राकृतिक आपदा—ऐसे समय में यदि पड़ोसी धर्म पूछे बिना मदद के लिए आगे आता है, कुछ दशक पहले की बात है की निवाड़ी नगर के व्यापारी लखन लाल गुप्ता जो जनरल स्टोर की दुकान चलाते थे, उनकी दुकान में अज्ञात कारणों से आग लग गई आग बेकाबू हो रही थी कोई भी व्यक्ति जाने को तैयार नहीं था उस समय नगर के बफाती खान ने साहस का परिचय देते हुए आग को बुझाने और लखन लाल गुप्ता को दुकान से बाहर निकालने में मदद की थी वह सामाजिक एकता का सबसे मजबूत संदेश है।
रक्तदान, जरूरतमंदों की सहायता, भोजन वितरण, राहत सामग्री पहुंचाना और सामाजिक सेवा के संयुक्त प्रयास हिंदू-मुस्लिम समुदायों के बीच विश्वास को और मजबूत कर सकते हैं।
अफवाहों से नहीं, संवाद से मजबूत होगा समाज
आज सोशल मीडिया के दौर में अफवाहें सामाजिक विश्वास को नुकसान पहुंचा सकती हैं। इसलिए धार्मिक या सामुदायिक विषयों से जुड़ी किसी भी सूचना को साझा करने से पहले उसकी पुष्टि करना जरूरी है।
स्थानीय प्रशासन, जनप्रतिनिधि, धार्मिक नेता और सामाजिक संगठन यदि मिलकर संवाद बनाए रखें, तो छोटी घटनाओं को बड़ा विवाद बनने से रोका जा सकता है।
नई पीढ़ी को देनी होगी भाईचारे की विरासत
निवाड़ी की आने वाली पीढ़ी को यह संदेश देना जरूरी है कि धार्मिक आस्था अपनी जगह है, लेकिन सामाजिक जिम्मेदारी सबकी साझा है।
मंदिर में बजती घंटी हो या दरगाह में उठती दुआ—दोनों के बीच इंसानियत, सम्मान और शांति का रिश्ता कायम रहना चाहिए। निवाड़ी की असली पहचान केवल उसके ऐतिहासिक स्थलों से नहीं, बल्कि उसके लोगों के आपसी रिश्तों से बनेगी।
मुश्किल वक्त में एक-दूसरे का हाथ थामना, पड़ोसी के सुख-दुख में शामिल होना और दूसरे की आस्था का सम्मान करना ही सच्चे भाईचारे की पहचान है।
यही भावना निवाड़ी को मजबूत करेगी, यही बुंदेलखंड की सामाजिक विरासत को आगे बढ़ाएगी और यही पूरे मध्य प्रदेश को एक बेहतर, शांतिपूर्ण और समरस समाज की ओर ले जाएगी।
संदेश स्पष्ट है—पहचान अलग, देश और इंसानियत साझा
हिंदू और मुस्लिम समुदायों के बीच भाईचारा किसी एक दिन या किसी एक आयोजन से पैदा नहीं होता। यह रोजमर्रा के व्यवहार, पारस्परिक सम्मान, सहयोग और विश्वास से मजबूत होता है।
हमें उन घटनाओं को सामने लाने की जरूरत है जहां एक हिंदू ने मुस्लिम भाई की मदद की और जहां किसी मुस्लिम परिवार ने हिंदू पड़ोसी के संकट में साथ दिया। ऐसे सकारात्मक उदाहरण समाज में विश्वास पैदा करते हैं और यह संदेश देते हैं कि नफरत फैलाने वाली आवाजें समाज की वास्तविक तस्वीर नहीं हैं।
हमारी पूजा की पद्धतियां अलग हो सकती हैं, हमारी धार्मिक परंपराएं अलग हो सकती हैं, लेकिन हमारी इंसानियत, हमारी नागरिक जिम्मेदारी और हमारे देश के प्रति प्रेम साझा है। यही सोच भारत की ताकत है।
हिंदू-मुस्लिम भाईचारा केवल सामाजिक आवश्यकता नहीं, बल्कि हमारी साझा विरासत है। इसे मजबूत करना हर नागरिक की जिम्मेदारी है।
क्योंकि अंततः—
“ धर्म हमें अपनी आस्था से जोड़ता है, लेकिन इंसानियत हमें एक-दूसरे से जोड़ती है।”
लेख
राजीव गुप्ता’पत्रकार’ निवाड़ी

