सरदार पटेल की जयंती पर निवाड़ी में गूंजा एकता का संदेश, ‘रन फॉर यूनिटी’ में उमड़ा जनसैलाब

सरदार पटेल की जयंती पर निवाड़ी में गूंजा एकता का संदेश, ‘रन फॉर यूनिटी’ में उमड़ा जनसैलाब
सांसद प्रतिनिधि राजेश पटेरिया ने दिखाई हरी झंडी, कलेक्टर जमुना भिड़े सहित जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और विद्यार्थियों ने लगाई दौड़

निवाड़ी। लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती एवं राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर शनिवार को निवाड़ी में ‘रन फॉर यूनिटी’ का आयोजन किया गया। शासकीय मॉडल स्कूल परिसर से शुरू हुई इस दौड़ में जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों, कर्मचारियों, विद्यार्थियों और गणमान्य नागरिकों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर राष्ट्रीय एकता, अखंडता और सामाजिक समरसता का संदेश दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ सांसद प्रतिनिधि राजेश पटेरिया ने हरी झंडी दिखाकर किया। इस दौरान कलेक्टर श्रीमती जमुना भिड़े सहित अन्य जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे। दौड़ के माध्यम से लोगों को देश की एकता, आपसी भाईचारे और सद्भाव बनाए रखने का संदेश दिया गया।
रन फॉर यूनिटी के बाद शासकीय उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय क्रमांक-1 निवाड़ी में राष्ट्रीय एकता दिवस पर सामूहिक शपथ ग्रहण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें उपस्थित जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों ने राष्ट्र की एकता, अखंडता एवं सुरक्षा बनाए रखने तथा देशवासियों के बीच एकता और भाईचारे की भावना को मजबूत करने की शपथ ली।
इस अवसर पर सरदार वल्लभभाई पटेल के राष्ट्र निर्माण में दिए गए योगदान को याद करते हुए उनके आदर्शों पर चलने का आह्वान किया गया।
रियासतों का विलय कर मजबूत भारत की रखी नींव
सरदार वल्लभभाई पटेल का जन्म 31 अक्टूबर 1875 को गुजरात के नडियाद में हुआ था। स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले पटेल स्वतंत्र भारत के प्रथम उप प्रधानमंत्री एवं गृह मंत्री बने। उनकी दृढ़ इच्छाशक्ति और मजबूत नेतृत्व क्षमता के कारण उन्हें लौह पुरुष के नाम से जाना जाता है।
उन्होंने महात्मा गांधी के नेतृत्व में स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई और खेड़ा तथा बारडोली सत्याग्रह का नेतृत्व किया। बारडोली सत्याग्रह की सफलता के बाद उन्हें सरदार की उपाधि मिली।
देश की आजादी के बाद 560 से अधिक रियासतों का भारतीय संघ में विलय कराने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। उनके प्रयासों ने एक मजबूत और एकीकृत भारत की नींव रखी। राष्ट्रीय एकता दिवस पर आयोजित कार्यक्रमों के माध्यम से उनके इसी ऐतिहासिक योगदान को याद करते हुए देश की एकता और अखंडता बनाए रखने का संकल्प दोहराया गया।